काशीपुर। उत्तराखंड के पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिरों को नई पहचान देने के लिए शुरू किए गए ''मानसखंड मंदिर माला मिशन'' के तहत अब काशीपुर के प्रसिद्ध भीमशंकर मोटेश्वर महादेव मंदिर का कायाकल्प होने जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने मंदिर के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू करते हुए कंसलटेंट के लिए निविदा आमंत्रित की है।
लोनिवि के एई बलवंत सिंह के अनुसार इस परियोजना का लक्ष्य मंदिर की प्राचीन धरोहर को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना है। इससे कुमाऊं क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी। कहा कि जल्द ही मंदिर समिति, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक के सुझावों के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मंदिर की महत्ता : भीम ने की थी स्थापना
मान्यता है कि महाभारत काल में महाबली भीम ने स्वयं इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल परिधि (मोटाई) है जिसके चलते इन्हें ''मोटेश्वर महादेव'' के नाम से पूजा जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मानस खंड कॉरिडोर में यह शामिल हैं प्रमुख मंदिर :
ऊधमसिंह नगर : चैती मैदान स्थित मोटेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रपुर अटरिया देवी मंदिर और नानकमता गुरुद्वारा साहिब
नैनीताल : गोल्ज्यू मंदिर, नैना देवी मंदिर, गर्जिया देवी मंदिर, कैंचीधाम मंदिर व हनुमान मंदिर