रुद्रपुर। जिले में वर्ष 2023 से अब तक 197 किशोर थैलेसीमिया मेजर और माइनर से पीड़ित पाए गए। इनमें 15 मामले इसी वर्ष के हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों के माध्यम से थैलेसीमिया से ग्रसित 18 वर्ष तक के किशोरों का पता लगाया गया है।
जांच के दौरान थैलेसीमिया मेजर के 107 और थैलेसीमिया माइनर के 90 मामले हैं। थैलेसीमिया मेजर गंभीर और जटिल रोग है। ग्लोबिन जीन में दोष के कारण हीमोग्लोबिन के लिए पर्याप्त मात्रा में ग्लोबिन नहीं मिल पाता है। हीमोग्लोबिन की पूर्ति केवल रक्त से ही हो सकती है। बीमार बच्चों को दो से चार सप्ताह में नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ता है। रक्तमज्जा (बोनमैरो) ट्रांसप्लांट ही इस रोग का निदान है, लेकिन इसमें 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आता है।
एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि थैलेसीमिया ग्रसित मरीजों को जिला अस्पताल के रक्तकोष में खून चढ़ाने के लिए सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार नियत हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पीड़ितों को नियमित रूप से डिसीरॉक्स नामक दवा दी जाती है। दवा का सेवन जीवनभर करना पड़ता है।