जनजाति के काश्तकार राजकिशोर राणा की संदिग्ध मौत के मामले में मृतक के परिजनों व उनकी जमीन खरीदने वाले पक्ष के लोगों ने एसडीएम विनोद कुमार व सीओ राजेश भट्ट को अपनी जमीन से संबंधी स्टांप पेपर और इकरारनामे दिखाए। अधिकारियों के समक्ष हुई लंबी वार्ता के बाद दोनों पक्षों में कुछ मुद्दों पर सहमति बन गयी। तय किया गया कि जमीन खरीदने वाले पक्ष की ओर से 43 लाख में खरीदी गई जमीन को छोड़कर बाकी जमीन पीड़ित पक्ष को वापस सौंपेगा।
एसडीएम विनोद कुमार के निर्देश पर सोमवार को दोनों पक्ष निर्धारित समय में तहसील पहुंचे। मृतक किसान के पक्ष से भीकम सिंह, मोहित, रोहित, जवाहर सिंह, भीम सिंह आदि थे। जबकि जमीन क्रय करने वाले व किसान की संदिग्ध मौत में आत्महत्या के लिए प्रताड़ित करने के आरोप में जेल गए प्रापर्टी डीलर पीसी जोशी के पक्ष से नीरज चंद, रोहित बोरा थे। दोनों ही पक्षों ने जमीन से संबंधित स्टांप एसडीएम व सीओ के समक्ष रखे। इस मौके पर पीड़ित पक्ष की ओर भीकम सिंह ने बताया कि सूरज चंद की हत्या के आरोप में जेल गए ललित ज्याला से मृतक की 14 बीघा जमीन का सौदा 1712000 रुपए प्रति बीघा के हिसाब से 23968000 रुपए में किया गया था।
जिसमें ज्याला ने दो बार में 50 लाख की रकम मृतक किसान को दी। इस दौरान कोतवाली में तैनात एक दरोगा को किसान के घर ले जाकर इसमें 43 लाख रुपए का आयकर लगाने की बात कही गई है। जमीन का सौदा 19668000 रुपए में करा दिया गया। उन्होंने बताया इसके बाद यह सौदा ज्याला ने पूरन जोशी की तरफ कर दिया। पूरन ने जमीन का आठ लाख रुपए राजकिशोर को दिया और एक अन्य पार्टनर ने अपनी सात बीघा जमीन राजकिशोर के नाम कर दी।
इस मौके पर बताया गया कि अब तक पीड़ित पक्ष पास 63 लाख की रकम पहुंच गई। इस पर दोनों पक्षों की ओर से सहमति भी जताई गई। काफी देर तक चली वार्ता के बाद एसडीएम व सीओ के समक्ष इस बात पर सहमति बनी कि विक्रेता पक्ष 63 लाख की रकम जो उन्होंने क्रेता से प्राप्त की है। उस रकम की जमीन क्रेता पक्ष के लिए छोड़ेगा। क्रेता पक्ष इस रकम के अलावा बाकी जमीन वापस विक्रेता को सौंपेगा। जो साढ़े दस बीघा के आसपास होगी।