हरित क्रांति का अग्रदूत उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम (टीडीसी) गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। संस्था पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है। कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं मिला है। टीडीसी के पूर्व डायरेक्टर सुरेश शर्मा ने संस्था के घाटे में होने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
टीडीसी में काशीपुर क्षेत्र के करीब चार सौ किसान अंशधारी हैं। क्षेत्र के किसानों ने करीब 13 हजार क्विंटल गेहूं टीडीसी को दिया था, जिसमें 1540 रुपये प्रति कुंटल की दर से भुगतान होना था, लेकिन 30 फीसदी किसानों को ही एडवांस भुगतान किया गया, जबकि 70 फीसदी किसानों को भुगतान नहीं हो सका है।
किसानों का संस्था पर करीब सवा करोड़ रुपये का बकाया है। भुगतान न होने से किसानों में भारी रोष है। पूर्व डायरेक्टर शर्मा ने कहा कि टीडीसी किसानों की धरोहर है। अकुशल प्रबंधन एवं मार्केटिंग स्टाफ का बाजार प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना, बाजार में गेहूं बेचना मगर कागजों में बिक्री न दिखाना संस्था के घाटे का प्रमुख कारण है।
अब संस्था करीब 22 करोड़ रुपये के घाटे में है। हालत यह है कि बैंक संस्था को कर्जा देने तक को तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों का चार माह का वेतन बकाया है। जिससे कर्मचारी परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। अब किसानों पर अपना गेहूं वापस ले जाने का दबाव डाला जा रहा है।
जिस कारण यूपी के बिलासपुर (रामपुर) के अधिकतर किसान अपना गेहूं वापस ले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि टीडीसी के घाटे में जाने के कारणों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस बारे में जब टीडीसी के अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया।