जसपुर। रमजान के चांद की शहादत के बाद बुधवार को सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। शहर इमाम कारी अयूब रजा नूरी और मुफती-ए-शहर शमीम अख्तर सअदी ने इसकी पुष्टि की। बृहस्पतिवार को रमजान का पहला रोजा होगा।
बुधवार की शाम होते ही मुस्लिम समुदाय के लोग अपने परिवार के साथ घरों की छतों पर चांद के दीदार के लिए पहुंच गए। लेकिन उन्हें चांद देखने को नहीं मिला। इसके बाद उलेमाओं ने बरेली से संपर्क कर चांद दिखाई देने की शहादत हासिल की। मस्जिदों से चांद की शहादत का ऐलान होते ही देर रात सभी ने एक दूसरे से मिलकर व फोन के जरिये रमजान की मुबारकबाद दी। इसके बाद शहर एवं देहात क्षेत्र की सभी मस्जिदों में तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया। और सहरी के लिए खरीदारी की।
रमजान की तैयारियों को लेकर मस्जिदों को सजाया गया। जामा मस्जिद के इमाम मौलाना शाने आलम ने कहा कि रमजान का महीना सब्र का महीना है। सब्र का बदला जन्नत है। इस महीने में रोजी बढ़ा दी जाती है। रोजेदारों को इफ्तार कराना बड़ा सवाब है। इसके बदले जन्नत मिलती है। रमजान मुबारक में चार कामों को जरूर करना चाहिए। इसमें पहली दो चीजें ऐसी हैं, जिनसे तुम अपने रब को राजी कर सकते हो। पहला कलमा तय्यबा और दूसरा इस्तिगफार की कसरत। दो अन्य चीजों में जन्नत की तलब और जहन्नुम की आग से पनाह मांगना शामिल है। इस महीने खूब सदका और खैरात करें। कुरान को समझ कर पढ़ने की कोशिश करें।