उप श्रमायुक्त कार्यालय और इंटार्क फैक्ट्री गेट पर धरना स्थल पर सोए श्रमिकों को शुक्रवार से प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने भारी फोर्स के साथ जबरन अनशन और धरने से उठा लिया। अनशन पर बैठे 10 श्रमिकों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान श्रमिकों की पुलिस कर्मियों के साथ तीखी झड़प भी हुईं। पुलिस के जाने के बाद मांगों को लेकर अड़े श्रमिक दोबारा धरने पर बैठ गए।
विभिन्न मांगों को लेकर इंटार्क कंपनी के श्रमिक 80 दिनों से और मिंडा श्रमिक करीब ढाई महीने से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन, श्रम विभाग और कंपनी की ओर सुध न लेने पर इंटार्क श्रमिक 10 दिनों से कंपनी गेट पर अनशन कर रहे थे, जबकि स्पार्क मिंडा कंपनी के श्रमिक सात दिन से उपश्रमायुक्त कार्यालय परिसर में अनशन पर हैं। शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे एसडीएम युक्ता मिश्रा, किच्छा एसडीएम नरेश चंद और एएसपी देवेंद्र पींचा पुलिस फोर्स के साथ इंटार्क फैक्ट्री गेट पर पहुंचे। टीम अनशन पर बैठे निहारिका सिंह, अखिलेश देवी, जरीना बेगम, विजय पांडे, विनय कुमार और अजीत कुमार को जबरन एंबुलेंस में बैठाकर जिला अस्पताल भर्ती कराने ले गए। इससे वहां हंगामा खड़ा हो गया और धरनास्थल पर श्रमिकों की पुलिस कर्मियों के साथ नोंकझोंक शुरू हो गई।
पुलिस अनशनकारियों के साथ ही इंकलाबी मजदूर केंद्र संगठन से जुड़ी पूर्णिमा और एक बुजुर्ग महिला को भी उठाकर ले गई। इसके विरोध में धरने पर बैठे आशा सिंह, सुशीला देवी, सुनीता देवी, रंजीत पाल, उमेश मिश्रा, दीना नाथ शुक्ला, बिरजू गिरी ने धरनास्थल पर अनशन शुरू कर दिया। श्रमिकों ने बताया कि बृहस्पतिवार देर रात करीब एक बजे एसडीएम अनशनकारियों का हाल जानने फैक्ट्री के बाहर आईं थीं, तभी उन्हें इसकी आशंका लग रही थी। इधर, अनशनकारियों को उठाए जाने के बाद फैक्ट्री गेट पर पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़, सुशील गाबा और कांग्रेस कार्यकर्ता भी श्रमिकों के समर्थन में पहुंच गए।
इसके बाद अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ करीब सात बजे उपश्रमायुक्त कार्यालय परिसर पर सात दिन से अनशन कर रहे स्पार्क मिंडा के श्रमिकों के धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अनशन पर बैठे श्रमिकों तारा आर्या, आशा, हेमचंद्र और हेम नैनवाल को भी जबरन उठाकर एंबुलेंस में बैठा दिया। पुलिस ने धरनास्थल से श्रमिकों के टेंट भी उखाड़ दिए। इसका विरोध कर रहे श्रमिकों की पुलिस कर्मियों के साथ तीखी झड़प हुई। श्रमिकों ने कहा कि पुलिस फोर्स ने उनका टेंट उखाड़कर गांधी पार्क में फेंकवा दिया था। अधिकारियों के जाते ही उपश्रमायुक्त कार्यालय परिसर में चार श्रमिक सपना, जमुना, मदन बोरा और प्रकाश भट्ट अनशन पर बैठ गए।