शासन स्तर से आवंटित परिसंपत्तियों के अमलदरामद कराने के निर्देशों का पालन नहीं करने डीएम की ओर से विभागों के कार्यालयाध्यक्षों के वेतन रोकने के आदेश से अफसरों में खलबली मची हुई है। वेतन रोकने के आदेश के 10 दिन बाद 17 विभागों और स्कूलों ने परिसंपत्तियों के अमलदरामद करने का जवाब दाखिल कर दिया है। डीएम के मुताबिक, जवाब दाखिल करने वालों का वेतन आहरित होता रहेगा।
दरअसल बीते 28 अप्रैल को डीएम ने सभी विभागों के कार्यालयाध्यक्षों को विभागीय परिसंपत्तियों का भू अभिलेखों में अंकन करने की कार्यवाही करने और जमीन पर अतिक्रमण की सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। यह भी कहा गया था कि जिन सरकारी विभागों की ओर से जिला या शासन स्तर से आवंटित जमीन का अपने विभाग के नाम अमलदरामद नहीं कराया है, वह संबंधित तहसीलों में तत्काल इस संबंध में कार्यवाही करवाएं।
जिन विभागों को आवंटित जमीन की जरूरत नहीं है, उसकी सूचना भी डीएम कार्यालय को भेजें। विभागीय जमीन पर अतिक्रमण और उसे करने वाले का नाम-पता भी देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विभागीय अफसरों ने डीएम के निर्देश के पालन में लापरवाही बरती थी। बीते 27 नवंबर को डीएम ने लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए खुद सहित 45 कार्यालयाध्यक्षों का नवंबर का वेतन रोकने के निर्देश देते हुए एक हफ्ते के भीतर संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने वैधानिक कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी थी।
मिली जानकारी के अनुसार छह दिसंबर तक जिला समाज कल्याण अधिकारी, आबकारी, प्रोबेशन अधिकारी, जिला होम्योपैथिक अधिकारी, खंड विकास अधिकारी रुद्रपुर, पशुआहार निर्माणशाला, राजकीय महाविद्यालय सितारगंज, काशीपुर, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी, जीआईसी आगवाला, दरऊ किच्छा सहित 17 विभाग और स्कूलों ने डीएम कार्यालय में जवाब दाखिल कर दिया है।
विभागीय परिसंपत्तियों के अमलदरामद में हीलाहवाली और अतिक्रमण के संबंध में जानकारी नहीं देने पर वेतन रोकने की कार्यवाही की गई थी। विभागों की ओर से जवाब दिए जा रहे हैं। जिन विभागों से जवाब आएंगे, उनके कार्यालयाध्यक्षों का वेतन आहरित होता रहेगा।
- डॉ. नीरज खैरवाल, डीएम।