ऊधम सिंह नगर के सितारगंज और बाजपुर की सहकारी चीनी मिल के उत्पादन में गिरावट से इस बार चीनी के दाम महंगे होने के आसार बढ़ गए हैं। सितारगंज में 11.56 और बाजपुर में 37.38 फीसदी उत्पादन घटा है। मिल की लागत से कम दाम पर बिकने वाली चीनी के उत्पादन में गिरावट से इस बार मिलों को भी घाटे की संभावना प्रबल हो गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व हरियाणा के खुले बाजार में बिकने वाली यहां की चीनी के मूल्य पर भी खासा असर दिखाई देगा।
सितारगंज की द किसान सहकारी चीनी मिल में पिछले साल एक लाख 59 हजार 395 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था। जो इस बार 18435 क्विंटल घटकर एक लाख 40 हजार 960 क्विंटल ही रह गया। इसी तरह बाजपुर चीनी मिल में गत वर्ष उत्पादित चीनी तीन लाख 29 हजार क्विंटल की तुलना में इस बार सिर्फ दो लाख छह हजार क्विंटल चीनी ही बनी। करीब एक लाख 23 हजार क्विंटल चीनी उत्पादन गिर गया। इससे चीनी मिल की आय कम होने के साथ ही नुकसान की संभावना बन गई है।
सितारगंज चीनी मिल द्वारा प्रति माह आरएफसी के माध्यम से सितारगंज के 78 कोटा धारकों को 1185 क्विंटल, खटीमा के 87 कोटा धारकों को 1319 क्विंटल चीनी आवंटित की जाती है। इसके अलावा चंपावत जिले के आरएफसी डिपो को 1350 और पिथौरागढ़ जिले के डिपो को 2700 क्विंटल चीनी की आपूर्ति की जाती है। कुल मिलाकर एक साल में 78 हजार 648 क्विंटल चीनी आरएफसी को बेची जाती है। शेष चीनी दिल्ली व हरियाणा प्रांत के खुले बाजार में बिकती है।
इसी तरह बाजपुर मिल से कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के कोटा धारकों को चीनी आपूर्ति के लिए प्रति माह 11 हजार क्विंटल चीनी आवंटित होती है। जो इस हिसाब से सालाना एक लाख 32 हजार क्विंटल बनी। शेष चीनी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद व रामपुर जिले और दिल्ली के व्यापारियों को बेची जाती है। मिलों में चीनी उत्पादन की लागत करीब 3800 रुपए प्रति क्विंटल है। चीनी की कम पैदावार से इस बार चीनी के दाम 4200 रुपए प्रति क्विंटल से भी अधिक हो सकते हैं।
सत्र 2016-17 के अप्रैल माह में भारत सरकार से पीडीएस के लिए चीनी का मूल्य 3395 रुपए प्रति क्विंटल तय हुआ था। आरएफसी के लिए कोटा चीनी मिलों में निर्धारित होता है। जो इस बार के उत्पादन से पूरा हो जाएगा। खुले बाजार पर जरूर इसका फर्क दिखेगा और चीनी महंगी भी हो सकती है।
विष्णु सिंह धानिक
आरएफसी, कुमाऊं मंडल नैनीताल।