सुधा चंद्रन,मशहूर भरत नाट्यम नृत्यांगना
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मशहूर भरतनाट्यम नृत्यांगना और अभिनेत्री सुधा चंद्रन ने अपनी सफलता की गाथा एक पैर से लिखी है। हादसे में दाहिना पैर गंवाने के बावजूद उनकी इच्छाशक्ति कमजोर नहीं पड़ी। भरतनाट्यम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त सुधा के जीवन पर तेलगू और हिंदी में दो फिल्में बन चुकी हैं। वर्तमान में सुधा टेलीविजन पर कई धारावाहिकों में नजर आ रही हैं।
रविवार को एक कार्यक्रम में शिरकत करने रुद्रपुर पहुंची भरतनाट्टयम नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने कहा कि वर्ष 1981 में जब एक हादसे के बाद 16 साल की उम्र में उनका दाहिना पैर काटना पड़ा था, तब भी उन्होंने हौसला नहीं खोया। जयपुर फुट के कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने दोबारा भरतनाट्यम के शो किये। उनके नृत्य को देखकर किसी को अहसास नहीं हुआ कि उनका एक पैर कृत्रिम है।
एक सवाल के जवाब में सुधा ने कहा कि उनके जीवन की त्रासदी ही उनके लिए प्रेरणा बन गई। तीन वर्ष की उम्र से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया और इस नृत्य में राष्ट्रीय पुरस्कार पाकर गौरव महसूस होता है। वह जल्द ही दिल्ली में जल ही जीवन अभियान के तहत यमुना बचाओ अभियान में शामिल होंगी।
जल्द धारावाहिक नागिन की तीसरी सीरीज में दिखेंगी
सुधा चंद्रन कहती हैं बतौर मुख्य अभिनेत्री व्यवसायिक फिल्मों में अधिक सफलता नहीं मिलने का उन्हें कोई मलाल नहीं हैं। उन्होंने चरित्र अभिनेत्री के रूप में भी मिलन, रघुवीर, अंजाम, मालामाल वीकली आदि फिल्मों में महत्वपूर्ण रोल किए। उन्होंने कहा कि टेलीविजन का विस्तार होने से अब कलाकारों के सामने अधिक अवसर हैं। कहा कि टीवी पर प्रसारित उनके धारावाहिक नागिन की तीसरी सीरीज भी जल्द शुरू होने वाली है। उन्होंने कहा कि उन्हें बड़े पर्दे पर भी दमदार रोल का इंतजार है।