बैड के अस्पताल भवन का निरीक्षण करते जिलाधिकारी
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जिस अस्पताल का दो-दो स्वास्थ्य मंत्रियों ने शिलान्यास किया, दो मुख्यमंत्रियों ने लोकार्पण किया और क्षेत्रीय विधायक जल्द शुरू होने के लगातार दावे कर रहे हैं, उस अस्पताल के परिसर में झाड़ियां उग आई हैं। न कोई रखरखाव, न सफाई की व्यवस्था। तीन साल से अस्पताल में ताले पड़े हैं, जिससे कई कमरों के दरवाजे जाम हो गए हैं। ऐसे तो दस करोड़ की लागत से बने अस्पताल का यह भवन खंडहर बन जाएगा।
मंगलवार को डीएम डा. नीरज खैरवाल ने विधायक पुष्कर सिंह धामी और सीएमओ आरके पांडे के साथ खटीमा के 100 बैड के अस्पताल भवन का निरीक्षण किया तो खामियां उजागर हुईं। निर्माण के बाद से ही यह अस्पताल बंद पड़ा है। रखरखाव के अभाव में भवन बेहद खराब स्थिति में है। अस्पताल परिसर झाड़ियां उग आई हैं। डीएम ने विधायक धामी और सीएमओ से अस्पताल में चिकित्सक, चिकित्सा संबंधी मशीनें, अस्पताल की सफाई, चौकीदार, चपरासी की तैनाती करने पर चर्चा की। डीएम ने बताया कि जल्द अस्पताल शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
राजनीति के भेंट चढ़ रहा अस्पताल
खटीमा। अस्पताल के मामले में शुरू से ही राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ मची रही। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ और डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी-अपनी सरकारों के समय में इस अस्पताल का शिलान्यास किया। कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरीश रावत ने अस्पताल का लोकार्पण किया, इसके बावजूद न तो अस्पताल को कोई नाम मिला और न ही जनता को कोई लाभ। अब चार माह से विधायक पुष्कर सिंह धामी लगातार यही दावा कर रहे हैं कि जल्द अस्पताल शुरू कराया जाएगा, लेकिन धरातल पर हालात सबके सामने हैं।