सितारगंज मंडी स्थित पूर्ति कार्यालय परिसर में पूर्ति निरीक्षक केके बिष्ट और लीना चंद्रा के बयान
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सितारगंज। राशन की कालाबाजारी के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना शुरू हो गई है। थानाध्यक्ष ने पूर्ति और एसएमआई कार्यालय के अधिकारी कर्मचारियों के बयान लिए। साथ ही सील गोदाम का भी निरीक्षण किया।
बीते 25 जुलाई को एसडीएम मनीष बिष्ट ने तहसीलदार सतीश चंद्र औरर पूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ मटिहा गांव में निजी गोदाम में छापा मारा था। गोदाम से करीब 920 सरकारी राशन से भरे बोरे बरामद हुए थे। हरियाणा और उत्तराखंड का मार्का लगे 1500 खाली बोरे भी मिले थे। इस पर एसडीएम ने गोदाम को सील कर डीएसओ को कार्रवाई के लिए लिखा था। अगले दिन डीएसओ ने डीएम डॉ. नीरज खैरवाल के निर्देश पर एसएमआई, गोदाम स्वामी पंकज कुमार, बिट्टू सिंह के खिलाफ नानकमत्ता थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
बुधवार को थानाध्यक्ष कमलेश भट्ट ने मामले की विवेचना करते हुए पूर्ति निरीक्षक केके बिष्ट और लीना चंद्रा के बयान दर्ज किए। इसके बाद एसएमआई कार्यालय पहुंचकर कर्मचारियों से मामले की जानकारी ली। साथ ही एसएमआई गोदाम के इंचार्ज दीपक सक्सेना, सहायक जगत निवास त्रिपाठी के भी बयान दर्ज किए। थानाध्यक्ष भट्ट ने बताया कि गोदाम सील होने के कारण स्टॉक चेक नहीं किया गया है। तहसीलदार की मौजूदगी में गोदाम का स्टॉक भी चेक किया जाएगा।