उलेमा ने कहा है कि ये चीज पहले से हराम है, लेकिन समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए हिदायत भी दी जा रही है। नगर निवासी हाजी इबादुर्रहमान और शुऐब आलम ने मदरसे के दारुल इफ्ता में सवाल किया था कि जुआ और शराब इस्लाम में कैसा है। कुरान और हदीस की रोशनी में जवाब दें।
मुफ्ती-ए-शहर शमीम अख्तर सअदी ने कुरान और हदीस की रोशनी में बताया कि जिस चीज को शरीयत ने हराम करार दिया उसे किसी भी बहाने से इस्तेमाल करना हराम जैसा ही है। जुआ और शराब के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है। इन दोनों चीजों से ही अन्य कुरीतियां भी फैलती हैं, इसलिए खुद बचने के साथ दूसरों को भी इससे दूर रखें। पांच वक्त की नमाज की पाबंदी करने से बुराइयों से दूरी बनी रहेगी
इस्लाह के लिए होता है दर्स
जसपुर। मुफ्ती-ए-शहर ने बताया कि लोगों को सही राह पर लाने के लिए रात को इशा की नमाज के बाद जामा मस्जिद में इमाम मौलाना सैयद शाने आलम हर दिन दर्स देते हैं जो शरीयत के हुक्म के बारे में बताते हैं। सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए लोगों को हुजूर की सुन्नतों पर अमल करना चाहिए।