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सिडकुल में विद्युतीकरण कार्य में मानकों की धज्जियां उड़ीं

Mon, 14 Jan 2019 12:31 AM IST
अरुण कुमार अमर उजाला ब्यूरो/चंदन बंगारी 
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रुद्रपुर के सिडकुल में विद्युतीकरण के तहत लगा टावर, इसमें अभी तार जुड़ना बाकी है।  - फोटो : amar ujala
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सिडकुल में करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे विद्युतीकरण के कार्य में मानकों को दरकिनार कर दिया गया। कार्यदायी संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम ने विद्युतीकरण के लिए न तो यूपीसीएल से अनुमति ली और न ही कार्यों का सुपरविजन कराया। अब आधे से अधिक कार्य होने पर निर्माण निगम को सत्यापन की याद आई तो यूपीसीएल ने हाथ खड़े कर दिए। विद्युतीकरण के कार्य की पूर्व में यूपीसीएल की तीन सदस्यीय टीम जांच कर चुकी है और कमियों के बारे में आला अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। सत्यापन नहीं होने से निगम का भुगतान भी फंसा हुआ है। 

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दरअसल सिडकुल में करीब तीन साल पहले खाली प्लाटों के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करने के साथ ही अंडरग्राउंड किया जाना था, ताकि प्लाटों को उद्योगों को आवंटित किया जा सके। इसके अलावा सिटी पार्क से भी हाइटेंशन लाइन को हटाया जाना था। करीब दो किमी से अधिक लंबी लाइनों को अंडरग्राउंड करने का जिम्मा यूपी निर्माण निगम को सौंपा गया था। नियमानुसार किसी क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य शुरू करने से पहले यूपीसीएल से अनुमति लेनी पड़ती है। विद्युतीकरण के लिए खरीदे गए सामान के साथ ही यूपीसीएल पूरे कार्य की मॉनीटरिंग करता है।

इसके लिए कार्यदायी संस्था को 15 फीसदी सुपरविजन चार्ज का भुगतान करना पड़ता है लेकिन सिडकुल में विद्युतीकरण के कार्य में नियमों को दरकिनार कर दिया गया। कार्यदायी संस्था ने न तो यूपीसीएल से कोई अनुमति ली न स्टीमेट दिया और न ही कोई सुपरविजन चार्ज का भुगतान किया। बिना यूपीसीएल के सुपरविजन में आधे से अधिक कार्य भी कर दिया गया है। अब जब कार्यदायी संस्था के भुगतान के आड़े सत्यापन आया तो यूपीसीएल से गुजारिश की गई। लेकिन यूपीसीएल ने सत्यापन के साथ ही इस कार्य को हैंडओवर लेने से भी इनकार कर दिया है। यह कार्य अब सिडकुल प्रशासन के गले की फांस बन गया है। वर्तमान में यह कार्य अभी रुका हुआ है। निर्माण निगम कराए गए कार्यों की एवज में भुगतान मांग रहा है और बिना सत्यापन के भुगतान नहीं हो सकता है। 
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सितारगंज में खरीदे सामान का होगी जांच 
रुद्रपुर। यूपी निर्माण निगम की ओर से सितारगंज सिडकुल में कराए जाने वाले विद्युतीकरण के कार्यों में मानकों की अनदेखी हुई है। बिना यूपीसीएल की अनुमति के सामान खरीद लिया गया। बीते शुक्रवार को कलक्ट्रेट में हुई उद्योग मित्र की बैठक में मुख्य सचिव के सामने यह मामला उठा था। एसई नरेंद्र सिंह टोलिया ने बताया कि मुख्य सचिव ने सितारंगज में खरीदे गए सामान के निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण में जो सामान खराब गुणवत्ता का मिलेगा तो उसे खारिज कर दिया जाएगा। यह सामान विद्युतीकरण के लिए बिना विभाग की अनुमति के खरीद लिया गया था। 

निर्माण निगम के अधिकारी कार्य में हुए खर्च की जानकारी एक कागज में लिखकर दे देते हैं, जो सही प्रक्रिया नहीं है। विद्युतीकरण के कार्य में गलत तरीका अपनाया गया है। आधा काम हो चुका है, इसमें कुछ खराब तो कुछ सामान चोरी हो चुका है। जितना खर्च होता है उसका सत्यापन होना जरूरी होता है लेकिन आधे से अधिक कार्य कराने के बावजूद यूपीसीएल से सत्यापन नहीं कराया है। नियमानुसार कार्य करने से पहले यूपीसीएल को स्टीमेशन देने के और अनुमति लेने के बाद खरीदे गए सामान को यूपीसीएल को दिखाकर लगाना होता है लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। यूपीसीएल ने आधा कार्य होने का हवाला देकर सत्यापन से इनकार किया है। हर कार्य की सीमित टाइम फिक्स कर रहे हैं। विद्युतीकरण कार्य पूरा करने के लिए चार महीने का समय दिया गया है। यदि तय समय में निगम ने कार्य पूरा किया तो सही है, नहीं तो विधिवत कार्यवाही कर दूसरी कार्यदायी संस्था बनाने पर विचार करेंगे। - सी रविशंकर, एमडी, सिडकुल। 

सिडकुल में विद्युतीकरण के कार्य में अनुमति नहीं ली गई थी। यदि विभाग कार्य को हैंडओवर कर लेता है तो इंडस्ट्री का लोड इन लाइनों पर आएगा। यदि मानकों के अनुसार कार्य नहीं हुए तो सप्लाई फेल होने की दशा में विभाग कटघरे में आ जाएगा। आठ महीने पूर्व विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी ने कार्यों की जांच कर रिपोर्ट में कमियां उजागर कर दी गई थी लेकिन कमियों को अब तक ठीक नहीं किया जा सका है। अगर कमियां पूरी करने के लिए कार्यदायी संस्था दोबारा स्टीमेट बनाकर सुपरविजन चार्ज दे तो हैंडओवर किया जा सकता है।  - एनएस टोलिया, अधीक्षण अभियंता, यूपीसीएल। 

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