रुद्रपुर। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर स्टाफ की कमी है जबकि कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। कई सीएचसी में कुल स्वीकृत पद 20 से 30 के बीच हैं लेकिन कर्मचारियों की तैनाती सिर्फ 10 से 15 तक ही है।
कई अस्पतालों में चिकित्साधिकारियों के नौ पद स्वीकृत हैं जबकि कार्यरत सिर्फ 4 से 5 ही हैं। वहीं, विशेषज्ञ चिकित्सकों में स्त्री रोग, बाल रोग, सर्जन और फिजिशियन के अधिकांश पद खाली हैं या एक से दो तक ही सीमित हैं। पीएचसी स्तर पर स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 5 से 9 पद स्वीकृत होने के बावजूद कार्यरत संख्या 3-4 ही है। कुछ केंद्रों में तो केवल एक ही चिकित्सा अधिकारी पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
जनरल फिजिशियन और सर्जन के पदों में भारी कमी
स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) और बाल रोग विशेषज्ञ कई केंद्रों पर उपलब्ध नहीं, एनेस्थेटिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद लगभग सभी केंद्रों पर रिक्त हैं। नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की संख्या भी जरूरत से काफी कम है। कुछ केंद्रों में लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स की उपलब्धता बेहतर है, लेकिन विशेषज्ञ सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।कुल मिलाकर, सीएचसी और पीएचसी दोनों स्तरों पर स्वीकृत पदों और कार्यरत स्टाफ में बड़ा अंतर है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।स्वास्थ्य विभाग के लिए यह चुनौती है कि खाली पदों पर शीघ्र नियुक्ति कर विशेषज्ञ सेवाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सके।
- सीएचसी व पीएचसी पर उपलब्ध संसाधनों के साथ सेवाएं सुचारु रूप से दी जा रही हैं। कुछ विशेषज्ञ पदों पर रिक्तियां हैं जिन्हें भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। जहां विशेषज्ञ नहीं हैं, वहां रोटेशन ड्यूटी और रेफरल व्यवस्था से उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। - डॉ. डीपी सिंह, एसीएमओ