रुद्रपुर। उत्तराखंड का पहला और एकमात्र दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र सरकारी अनदेखी के कारण बंदी के कगार पर पहुंच गया है। यूजीसी से बजट न मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने भी इस संस्थान को गोद लेने से मना कर दिया है। सरदार भगत सिंह डिग्री कॉलेज प्रशासन भी इस संस्थान को स्ववित्त पोषित मोड पर नहीं चला पा रहा है। इस कारण फिलहाल कौशल केंद्र में नए प्रवेश रोक दिए गए हैं।
बच्चों को 12वीं के बाद व्यावसायिक और रोजगारपरक शिक्षा देने के लिए यहां वर्ष 2016 में दीनदयाल कौशल केंद्र खुला था। इस संस्थान के संचालन के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत यूजीसी से दो साल के लिए बजट मिला था। इसके बाद संस्थान को अपने संसाधनों और कौशल केंद्र में बैंकिंग फाइनेंस और डीटीपी कोर्स, डिप्लोमा, डिग्री प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की फीस से चलाया जाना था।
स्ववित्त पोषित मोड में संस्थान के न चल पाने के कारण वर्ष 2020 में एक बार फिर से संस्थान को चलाने के लिए यूजीसी से दो करोड़ रुपये का मिलना बजट तय हो गया था लेकिन मिला नहीं। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इस संस्थान को गोद लेने से मना कर दिया।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीसी पंत बताते हैं कि उन्होंने हाल में पदभार ग्रहण किया है। दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र की जानकारी जुटाई जा रही है। कौशल केंद्र के प्रभारी डॉ. एके पालीवाल बताते हैं कि पुराने विद्यार्थियों के कोर्स, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स पूरे करवाए जा रहे हैं। सत्र 2022-23 के बाद संस्थान में नए प्रवेश नहीं हुए हैं।
पढ़ाने के लिए नहीं एक भी प्राध्यापक
रुद्रपुर। इस केंद्र में पढ़ाने के लिए प्राध्यापक तक नहीं हैं। संस्थान को स्ववित्त पोषित मोड करने के बाद प्राध्यापकों का वेतन करीब आधा हो गया था जिसके दो प्राध्यापकों ने दूसरे कॉलेज में नियुक्ति ले ली जबकि एक ने नौकरी छोड़ दी। अन्य स्टाफ भी नौकरी छोड़ चुका है। इसलिए केंद्र में ताले लटके हैं।
पीजी की डिग्री की भी तैयारी
रुद्रपुर। इस केंद्र में बैंक फाइनेंस और डीटीपी पाठ्यक्रमों के कोर्स, डिप्लोमा, डिग्री की सुविधा है। यहां व्यावसायिक पीजी कोर्स शुरू करने की भी तैयारी थी। यूजीसी से मास्टर ऑफ वोकेशनल कोर्स (एम-वॉक) के लिए मान्यता भी मिल गई थी लेकिन संस्थान के सामने वित्तीय संकट आने से सभी तैयारियां अधूरी रह गईं।