फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बहन जी के आने से तराई में बदल सकते हैं समीकरण

Mon, 06 Feb 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
उत्तराखंड के चुनावी रण में जहां राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए बड़े चेहरों के साथ प्रचार में लगे हैं। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती भी पहाड़ में हाथी को बढ़ाने में नजर आ रही हैं। माना जा रहा है कि मायावती का राज्य के चुनाव में पहला दौरा तराई के चुनावी समीकरण को बदल सकता है। वीवीआईपी विधानसभा में शुमार सितारगंज की सीट पर बसपा ने बंगाली समाज के इतर दलित, सिख, पूर्वांचल व मुस्लिम वोटों को साधने का प्रयास किया। जनसभा में इन वर्गों की भारी मौजूदगी चौंकाने वाली रही।

  2002 के विधानसभा चुनाव के बाद तराई में सितारगंज सीट दस साल तक बसपा की झोली में रही। मगर 2012 के चुनाव में तराई से बसपा खाता भी नहीं खोल पाई। गढ़वाल मंडल से बसपा के सुरेंद्र राकेश, सरबत करीम अंसारी समेत करीब तीन सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज की थी। 2017 के चुनाव में कुमाऊं मंडल से भी बसपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए जहां प्रदेश के आला नेता प्रचार में लगे हैं। वहीं, मायावती का भी तराई की सीटों पर पार्टी के पक्ष में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों से पहले ही निशाना साधना भी इसी ओर इशारा करता है। रविवार की जनसभा में जहां हजारों की संख्या में महिलाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ देखी गई। वहीं, युवाओं में भी मायावती के प्रति खासा उत्साह तराई के समीकरण बदलने की ओर संकेत दे रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


  मायावती ने सतारगंज में रैली करके पार्टी को मजबूती और प्रत्याशियों में ऊर्जा का संचार किया। हालांकि, इस जनसभा में बसपा की ओर से जनता के बैठने के लिए जहां दस हजार कुर्सियों का इंतजाम किया गया था और मैदान भी खचाखच भरा रहा। उसमें अधिकांश दलित वर्ग की भीड़ ही देखी गई। महिलाओं में मायावती के प्रति जो उत्साह दिखा, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार तराई में बसपा अपना खाता खोल सकती है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें