काशीपुर। पहले चेनमैन और अब संग्रह अमीनों के पद रिक्त होते जा रहे हैं। जिन लेखपालों पर काम का बोझ आया है उनके भी 40 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं। चेनमैन और अमीनों के पद खाली होने से हदबंदी और राजस्व वसूली का कार्य प्रभावित हो रहा है। एक तरफ भूमि की धोखाधड़ी रोकने के लिए एसआईटी गठित की गई है, वहीं जमीनों को नापने-जांचने वाला स्टाफ ही नहीं है।
ऊधमसिंह नगर की नौ तहसीलों में चेनमैन के 16 पद सृजित हैं। अभी सिर्फ किच्छा और बाजपुर में एक-एक चेनमैन है। चेनमैनों पर जमीनों की हदबंदी, सीमा निर्धारण और पैमाइश का जिम्मा होता है। इसके लिए उन्हें सौ कड़ी यानी 66 फीट की जरीब दी जाती थी। राज्य गठन के बाद से तहसीलों में चेनमैन और अमीनों के पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। विभिन्न न्यायालयों से आए दिन सीमांकन और हदबंदी के केसों में निर्णय होते हैं लेकिन जमीन मापने के लिए तहसीलों में न तो जरीब हैं और न चेनमैन।
हदबंदी में माप-जोख सिर्फ जरीब से ही हो सकती है। ऐसे में हदबंदी की समय सीमा न तय होने के कारण मारपीट और कोर्ट केस, सरकारी जमीन, चकरोड पर कब्जे के मामले बढ़ रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण चेनमैनों के काम का बोझ भी लेखपालों पर आ गया है। पहले से ही लेखपालों के भी 40 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। एक-एक लेखपाल पर तीन से लेकर चार हल्कों तक का जिम्मा है। अनुसेवकों के पदों पर नई नियुक्तियां न होने से लेखपालों को ही राजस्व वसूली, अभिलेख दुरुस्तीकरण, आपदा सर्वे और भूमि विवादों के निपटारे का काम भी करना पड़ रहा है। संवाद
क्या होती है भूमि मापने वाली जरीब
1570 ईस्वी में बादशाह अकबर के दीवान राजा टोडरमल ने जमीन पैमाइश में सुधार का कार्य शुरू किया। तब जमीन की नाप के लिए 66 फीट या 20 मीटर लंबी लोहे की चेन यानी जरीब बनाई गई। उत्तराखंड में मिट्रिक जरीब प्रचलन में है। जबकि पंजाब व हरियाणा में शाहजहानी जरीब से पैमाइश होती है। फिलहाल जरीब को हदबंदी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पैमाइश के लिए लेखपाल फीते का प्रयोग करते हैं। जमीन की सही माप के लिए सरकार अब इलेक्ट्राॅनिक्स टोटल स्टेशन (ईटीएस) का उपयोग करने पर विचार कर रही है।
कोट
तहसील में चेनमैन के पद रिक्त है और जरीब की व्यवस्था है। पैमाइश की जिम्मेदारी कानूनगो की होती है। - अभय प्रताप सिंह, एसडीएम काशीपुर