नोटबंदी का असर पंतनगर सिडकुल के दवा कंपनियों पर भी बहुत तेजी से पड़ा है। कच्चे माल का आयात ठप होने के कारण और श्रमिकों को एडवांस के तौर पर नगद धनराशि की व्यवस्था नहीं होने से भी कारोबार करीब 45 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो गया है। वहीं कंपनियों के प्रबंधन के समक्ष लाचारी भी यह है कि वह अपनी परेशानी को खुले मुंह से बयां नहीं कर सकते।
वर्तमान में पंतनगर सिडकुल में करीब आधा दर्जन से अधिक दवा कंपनियां यहां पर अपना उत्पादन कर रही हैं, लेकिन इसके समक्ष भी नोटबंदी की मार सीधे तौर पर कैश की किल्लत से पड़ी है। दवा कंपनियों में वर्तमान में कच्चा माल गुड़गांव, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से आता है। इसमें ट्रकों के माल ढुलान में गाड़ियों के नगद खर्चे, डीजल आदि सहित श्रमिकों को हर माह की 15 से 25 तारीख तक वेतन एडवांस के तौर पर नकद दिया जाता है, लेकिन कैश की किल्लत के कारण दवा कंपनियों पर भी प्रोडक्शन गिरने की मार पड़ी है।
पंतनगर सिडकुल में जंक्शन पाल, बाल फार्म, बीएचबी और जोयस हर्बल केयर प्रा.लि. कंपनियां यहां पर दवा के लिए अपना उत्पादन तैयार करती हैं। पंतनगर सिडकुल के जोयस हर्बल केयर प्राइवेट लिमिटेड के जीएम कमलेश कुमार का कहना है कि जब से नोटबंदी हुई है उनके कारोबार पर 45 से लेकर 60 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। कमलेश कुमार का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा परेशानी ट्रकों को नगदी नहीं देने के कारण कच्चा माल नहीं आ पा रहा है। वहीं श्रमिकों को वेतन का आधा हिस्सा एडवांस के तौर पर दिया जाता है जो कि 15 से लेकर 25 तारीख तक देना होता है। इस कारण भी प्रोडक्शन पर असर पड़ा है। वर्तमान में करीब 50 प्रतिशत श्रमिक काम पर नहीं आ पा रहे हैं। बाहरी प्रांतों के श्रमिकों के काम पर नहीं आने से भी दवा कंपनियों पर उत्पादन घटने की मार पड़ी है। उनका कहना है कि सिडकुल और रुद्रपुर शहर में यदि जल्द कैश की किल्लत हल नहीं हुई तो यह उद्यमियों के लिए काफी परेशानी पैदा करेगा।