काशीपुर। अमर उजाला की ओर से आयोजित काव्य कैफे में बुधवार शाम को काव्य रस की फुहारें बरसीं तो श्रोता झूम उठे। मशहूर कवियों ने हास्य, करुणा व श्रृंगार रस की कविताएं सुना कर खूब तालियां बटोरीं।
काव्य कैफे का शुभारंभ विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, गजेंद्र मोहन, शक्ति प्रकाश अग्रवाल, तुषार अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मयंक गुप्ता, महेश चौहान, दीपक यादव, चकरेश जैन, सिद्धांत गोयल आदि ने किया। कवि स्वयं श्रीवास्तव ने काव्य कैफे का संचालन किया। इसके बाद हास्य कवि सौरभ जायसवाल ने खिले हुए रोज सी लगती है, कैटरीना के पोज सी लगती है... पत्नी चिकनपॉक्स का टीका, साली बूस्टर डोज सी लगती है... सुनाकर लोगों को खूब हंसाया।
हास्य कवि प्रमोद पंकज ने अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बोल, नब्बे डीजल सौ पेट्रोल... सुनाकर महंगाई पर कटाक्ष किया। कवयित्री मणिका दुबे ने वजूद धागे सा टूट जाना सही नहीं है.. सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन कर रहे कवि स्वयं श्रीवास्तव ने बेरोजगारी की समस्या पर तंज करती हुई पंक्तियां ऐसा नहीं कि सारा फलक मांग रहे हैं हम सिर्फ अपने हिस्से का हक मांग रहे हैं... सुनाया तो समूचा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मशहूर कवि अजहर इकबाल ने माइक संभाला तो श्रोताओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। उन्होंने सुनाया... हर तरफ घात में बैठे हैं यहां दुशासन, वीर अर्जुन सा लड़ैया नहीं आने वाला... और दया अगर लिखने बैठूं तो होते हैं अनुवादित राम, रावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम... कविता पढ़कर समा बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक संजय राजपूत ने किया।
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