सदमे से एक और चीनी मिल कर्मी प्रदीप बाल्मीकि की मौत हो गई। परिजनों और मिल कर्मियों ने चीनी मिल बंद किए जाने के निर्णय से पहुंचे सदमे के कारण मौत का होना बताया। उन्होंने मिल गेट पर शोक सभा आयोजित कर सरकार के खिलाफ जमकर गुबार निकाला। इससे पहले मिल कर्मी बद्रीदत्त बिष्ट की भी सदमे से मौत हो चुकी है।
भोला कालोनी निवासी प्रदीप बाल्मीकि (48) की रविवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे मौत हो गई। शाम को प्रदीप की गमगीन माहौल में नगर के शमशान घाट में अंत्येष्टि कर दी गई। इससे पहले चीनी मिल गेट के निकट चल रहा अनशन 19वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान शोक सभा की गई। दो-दो मौतों से गुस्साए वक्ताओं ने चीनी मिल बंद किए जाने के निर्णय को सरकार का तुगलकी फ रमान बताते हुए जमकर आक्रोश व्यक्त किया। मृतक प्रदीप के बड़े पुत्र विपिन के मुताबिक पिछले 28 वर्षों से सीजनल, परमानेंट स्वच्छकार के पद पर सेवाएं दे रहे उसके पिता चीनी मिल कर्मी बद्रीदत्त भट्ट की मौत के बाद से ही गहरे सदमे में थे।
रविवार सुबह मौत से पहले भी उनका यही कहना था कि यदि चीनी मिल को बंद कर दिया गया तो ऐसे में वह दो-दो बेटियों सहित पांच बच्चों का आर्थिक बोझ कैसे वहन करेंगे। इसके बाद अचानक ही वह गश खाकर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। प्रदीप की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। पति की मौत से पत्नी संतोष देवी, पुत्रियां जूबी, लक्ष्मी के अलावा पुत्र विपिन, राहुल, बिट्टू, रजत आदि का रो-रोकर बुरा हाल था। रविवार शाम नगर के शमशान घाट पर गमगीन माहौल में मृतक प्रदीप की अंत्येष्टि कर दी गई।
इस दौरान बीएमएस के प्रांतीय उपाध्यक्ष चौ. ऋषिपाल सिंह, इंटक नेता रोहिल चरण, श्रमिक नेता सतीश दूबे, सुरेश कुमार चौहान, मनोज अग्रवाल, अवतार सिंह, राधेश्याम दूबे, अतर सिंह, प्रेमराज, अवध पाण्डेय, एमसी अग्रवाल, आरके सिंह, सुरेंद्र सिंह, आरके यादव, धनुषधारी, विनोद कुमार, यूके रावत, करणवीर सिंह आदि थे।