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हरि बोल के जाप के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली 

Fri, 16 Mar 2018 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  दिनेशपुर।
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दिनेशपुर के कामना सागर में डुबकी लगाते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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हरिचांद गुरुचांद मतुआ मिशन के संस्थापक हरिचांद ठाकुर के 206वें जन्मोत्सव पर चल रहे तीन दिवसीय मतुआ महा मेला जारी है। मेले के दूसरे दिन महावारूणी पर्व पर देश भर के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल के महाकाली अंचल के कई कस्बों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कामना सागर में आस्था की डुबकी लगाई। बाद में हजारों मतुआ अनुयायियों ने ढोल नगाड़ों के साथ नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली। शुक्रवार को महा मेले का समापन होगा। 

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बृहस्पतिवार को स्नान लग्नानुसार दोपहर 12 बजे से शाम 4:30 बजे तक चला। सुबह हजारों मतुआ अनुयायियों ने ढोल नगाड़ों और हरिचांद ठाकुर के चित्र, आचार्य गोपाल महाराज और उनके शिष्य विवेकानंद ब्रह्मचारी को रथ में बैठाकर नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली। हरि मंदिर प्रांगण से शुरू हुई शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों और गलियों से होकर वापस हरिमंदिर आकर समाप्त हुई। शोभायात्रा में शामिल लोग ‘जय-हरि बोल जय-हरि बोल’ का जाप कर रहे थे। 

सुबह आचार्य गोपाल महाराज ने श्री ओढ़ाकांदी धाम बांग्लादेश के मुख्य तालाब, सात समुद्र और देश की प्रमुख 13 नदियों से लाए गए जल को कृत्रिम तालाब (कामना सागर) में मिलाकर उसे पवित्र किया। हजारों लोगों ने कामना सागर में फल दान किए। मंदिर परिसर में देश भर से आए श्रद्धालुओं की टीमों का क्रमबद्ध अखंड हरिनाम कीर्तन और अटूट लंगर जारी रहा। बाद में मंदिर परिसर में आचार्य गोपाल ब्रह्मचारी और उनके प्रमुख शिष्य विवेकानंद ब्रह्मचारी ने सैकड़ों महिला एवं पुरुषों को सामूहिक दीक्षा दी। मंदिर परिसर और आसपास के दोनों ओर भव्य मेला लगा रहा। रात को मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। 
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भीड़ उमड़ने से यातायात रहा प्रभावित 
दिनेशपुर में महावारूणी स्नान महोत्सव में उमड़ी भीड़ के चलते जाफरपुर मार्ग पर दिन भर यातायात व्यवस्था प्रवाहित रही। भीड़ को देखते हुए जाफरपुर मार्ग के टेंपो यूनियन को अपने अड्डे को अस्पताल के पास से हटाकर नगर सीमा से बाहर श्मशान घाट के पास ले जाना पड़ा। जाफरपुर की ओर से आने वाले वाहनों को बुक्सौरा और दुर्गापुर मार्ग से डायवर्ट किया गया। 

मतुआ संप्रदाय की पूजा पद्धति बिल्कुल अलग 
दिनेशपुर में मतुआ संप्रदाय हिंदू सनातन धर्म का ही एक अंग है, लेकिन अन्य संप्रदाय की अपेक्षा इस संप्रदाय की पूजा पद्धति बिल्कुल अलग है। इसमें लाल झंडा निशान को विशेष महत्व दिया जाता है। ढोल, शंख और कांस ध्वनि के बीच श्रद्धालु लाल निशान हाथ में लेकर नंगे पैर तेज गति से समूह के रूप में मंदिर और अन्य पूजा स्थलों पर जाते हैं। मंदिर में कीर्तन के नाम पर सिर्फ हरि बोल का जाप किया जाता है। 


शक्तिफार्म में भी सैकड़ों ने लगाई आस्था की डुबकी
शक्तिफार्म में मतुआ धर्म संस्थापक श्री श्री हरिचांद ठाकुर के जन्मोत्सव एवं मधु कृष्ण त्रयोदशी के शुभ लग्न पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हरिचांद गुरुचांद धर्म मंदिर स्थित कामना सागर (कृत्रिम तालाब) में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान हरि बोल के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।


बुधवार को मंगल घटस्थापना एवं गंगा वरण के साथ पांच दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम और मेले का शुभारंभ हुआ। मंदिर समिति ने बाहर से आने वाले मतुआ श्रद्धालुओं का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। बृहस्पतिवार दोहपर 12 बजे श्रद्धालुओं ने कामना सागर में आस्था की डुबकी लगाई और मन्नत मांगी। इस दौरान जतिन भुइया, दीपचांद राय, भंजन राय, विजन राय, प्राण बढ़ई, गोकुल विश्वास आदि थे। ब्यूरो

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