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योगी के सीएम बनने से परिसंपत्तियों के बंटवारे की आस

Sun, 19 Mar 2017 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सितारगंज।
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योगी आदित्यनाथ
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सितारगंज। उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड मूल के गोरखपुर यूपी से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से जहां राज्य के सम्मान में गौरव का एक अध्याय और जुड़ गया वहीं, 17 वर्षों से राज्य की सिंचाई परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के निस्तारण की भी उम्मीद बढ़ गई है। माना जा रहा है कि यूपी में उत्तराखंडी सीएम बनने के साथ ही दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने से अब राज्य को यहां की परिसंपत्तियों पर अधिकार मिल ही जाएगा।
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राज्य गठन के दौरान राज्य के सीमांत जिले गढ़वाल के हरिद्वार की नहरों, कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर जिले में नानकसागर, बैगुल, धौरा जलाशय आदि संपत्तियां और चंपावत जिले के शारदा सागर की नहरों के अलावा बनबसा कालोनी, आवास, भवन आदि यूपी के ही अधीन रहे। इसको लेकर राज्य सरकार की यूपी सरकार से कई दौर की वार्ता भी हुई। दो फरवरी 2015 को यूपी, उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिवों के बीच वार्ता में आपसी सहमति पर गढ़वाल, कुमाऊं की 37 नहरें और सिंचाई संपत्ति की 25 फीसदी संपत्ति उत्तराखंड को देने पर मोहर लगी।

फिर 2016 में इन परिसंपत्तियों में से कुछ नहरें और कुछ संपत्ति राज्य को मिल भी गई हैं लेकिन, अभी भी पूरी तरह से परिसंपत्तियों पर उत्तराखंड को अधिकार नहीं मिला है। उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है।
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राज्य के ग्राम पंचेर, जिला पौड़ी गढ़वाल में पांच जून 1972 में आनंद सिंह बिष्ट के घर उनका जन्म हुआ था। योगी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की उपाधि ली। इसके बाद 1993 में गोरखपुर चले गए और पांच वर्ष के बाद 1998 में पहली बार 26 साल की आयु में सांसद बने। उत्तराखंड के लिए यह गौरव की बात है कि उत्तराखंडी को उत्तर प्रदेश की सत्ता सौंपी जा रही है। वहीं, यूपी-उत्तराखंड के बीच चल रहे सिंचाई परिसंपत्ति विवाद के सुलझने की भी उम्मीद बढ़ गई है। 
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