बैठकी होली गायन की परंपरा को आगे बढ़ाने और इसकी विस्तृत जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए काशीपुर निवासी एक बैंक प्रबंधक ने स्वरचित पुस्तक का सहारा लिया है। इसके लिए उन्होंने कुमाऊंनी बैठकी होली गीतों का 13 रागों में संग्रह कर पुस्तक प्रकाशित कराई है। वह खुद भी 31 साल से होली गायन कर रहे हैं।
सिंघान मोहल्ला काशीपुर निवासी शरद पंत खटीमा उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक हैं। शरद बताते हैं कि उनके पिता स्व. अरविंद पंत काफी पहले से घर पर बैठकी होली आयोजित करते थे। इसमें कई शहरों के होल्यार पहुंचकर वाद्य यंत्रों के साथ होली गायन करते थे। 1974 से उनका रुझान भी होली गायन की तरफ हुआ। 1990 से उन्होंने भी होली गायन की शुरूआत की और मशहूर होल्यार संतसरन माथुर से होली गायन की कैसेट लेकर गायन का अभ्यास किया।
बैठकी होली के कार्यक्रमों में जाने से भी उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। 2014 में उन्हें होली गायन के संबंध में एक पुस्तक लिखने का विचार आया जिसके लिए उन्होंने कुमाऊंनी बैठकी होली के गीतों का संग्रह शुरू कर दिया।
इसके लिए उन्होंने अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रामनगर आदि स्थानों के होल्यारों से संपर्क किया और एक साल में धमार, यमन, काफी, जंगला काफी, खमाज, सहाना, देस, विहाग, जैजैवंती, पीलू, झिंझौटी, भैरवी और विविध राग में होली गीतों को संकलित कर पुस्तक प्रकाशित कर इसे लोगों में निशुल्क बांटा। उनका कहना है कि इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को इसके प्रति जागरूक होना पड़ेगा।