न्यायिक मजिस्ट्रेट शचि शर्मा की अदालत नेे भीख मंगवाने के लिए एक बालिका का अपहरण करने के आरोप में एक महिला और अंधे किशोर को तीन-तीन साल की कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार ग्राम सीतापुर कालोनी ग्राम गुलड़िया निवासी ओम प्रकाश ने 26 अप्रैल 2015 को बाजपुर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर कहा कि उसकी पुत्री आशा (11) घर से दुकान पर सामान लेने गई थी। वहीं से गायब हो गई।
पुलिस ने खोजबीन के बाद गांव की निवासी दीपा पत्नी राजेंद्र प्रसाद से पूछताछ की। दीपा ने पुलिस को बताया कि आशा को उसने ठाकुरद्वारा में किराये के एक मकान में रखा है। उसका भाई किशोर और देवर दीपक (11) है। पुलिस ने 11 दिन बाद लड़की को बरामद किया।
बरामद आशा ने अदालत में बताया कि दीपा, दीपा का अंधा भाई किशोर और देवर दीपक उसे ठाकुरद्वारा ले गए। वहां किशोर उसे अपने साथ भीख मांगने ले जाता था। अदालत ने साक्ष्यों का परीक्षण किया। गवाहों के बयान सुने। वादी के वकील अनुज साहनी और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद दीपा और किशोर का अपराध सिद्ध पाया गया। अदालत में दीपा और किशोर को तीन तीन साल का कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थ दंड नहीं देने पर चार-चार माह की अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया।