आदि गुरु शंकराचार्य विद्यालय की मान्यता रद्द होने पर विद्यालय प्रबंधन ने पलटवार कर कहा कि सचिव, विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर को यह अधिकार है ही नहीं। उन्होंने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की है। इधर, स्कूल बीईओ के कहने पर भी बंद नहीं किया गया है।
आदि गुरु शंकराचार्य विद्यालय की मान्यता जमीन के गलत दस्तावेज पाए जाने पर रद्द कर दी गई है। 26 फरवरी 2017 को सचिव, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि क्षेत्रवासी इस विद्यालय के सत्र 2017-18 में अपने बच्चों का हाइस्कूल और इंटर कक्षाओं में प्रवेश न कराएं। विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के फार्म उच्च न्यायालय की निगरानी में थारु राजकीय इंटर कालेज को सौंप दिए गए हैं, लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों की टीसी थारु राइंका को नहीं सौंपी है। टीसी और एसआर नंबर के बगैर इन छात्र-छात्राओं का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। विद्यालय की मान्यता को लेकर भूड़ निवासी रामभरोसे ने एसडीएम विजयनाथ शुक्ल को शिकायती पत्र सौंपा था। जांच में पाया गया कि स्कूल प्रबंधन ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर स्कूल की मान्यता प्राप्त कर ली थी। मामले में प्रबंधक की गिरफ्तारी हो चुकी है।
विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर ने जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच कर विद्यालय की मान्यता रद्द कर दी थी। मामले में डीईओ डॉ. पीएल सिंह का कहना है स्कूल की मान्यता रद्द होने के कारण स्कूल के बच्चों के फार्म दूसरे विद्यालय से भराए जाने के लिए न्यायालय से आदेश जारी हुए थे। इधर, बीईओ सोनी मेहरा ने कहा कि उन्होंने एजीएस प्रबंधन को मान्यता रद्द होने के बाद विद्यालय बंद करने को कहा है। लेकिन एजीएस प्रबंधन द्वारा बिल्कुल भी सहयोग नहीं दिया जा रहा है। थारु राइंका के प्रधानाचार्य सुदर्शन वर्मा ने कहा कि हाइस्कूल के आठ और इंटर के 25 बच्चों के आवेदन एजीएस प्रबंधन ने कोर्ट के माध्यम से उन्हें सौंपे हैं, लेकिन उन बच्चों का पहले यहां प्रवेश होना है। उसके बाद यहां से आवेदन रामनगर बोर्ड कार्यालय को भेजे जाएंगे। वर्मा ने बताया कि उनकी सचिव विद्यालयी शिक्षा परिषद से इन बच्चों के संबंध में दोबारा वार्ता हुई है। उन्होंने फार्म यथास्थिति भेजने को कहा है। अब फार्म बोर्ड कार्यालय को भेजे जा रहे हैं।
उत्तराखंड शासन के सचिव ने दी है मान्यता
मामले में एजीएस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य आरएस दुबे का आरोप है कि उनके विद्यालय की मान्यता सचिव उत्तराखंड शासन से मिली है। सचिव, विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर को विद्यालय की मान्यता रद्द करने का अधिकार ही नहीं है। इस आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट में वाद संख्या 2046 एजीएस इंटर कॉलेज बनाम उत्तराखंड सरकार के नाम से लंबित है। उन्होंने कहा कि अभी भी बच्चे उनके विद्यालय में पढ़ रहे हैं।