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चार्ज पर आए एसडीएम ने निपटाया करोड़ों का मामला

Thu, 04 Jun 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, रुद्रपुर
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200 करोड़ की नजूल भूमि चार लोगों को सोची समझी साजिश के तहत लुटाने की तैयारी थी। कुछ अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर इसकी पटकथा तैयार की। नियमित एसडीएम के छुट्टी पर जाने के बाद प्रभारी एसडीएम ने चार लोगों के नाम जमीन करने का फैसला कर लिया। जबकि वर्षों से ये वाद लंबित था।
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 यूपी सरकार ने नौ नवंबर 1966 में 1189 एकड़ भूमि रुद्रपुर नगर पालिका को प्रबंधन में दी थी। इसी भूमि में ग्राम भदईपुरा (अब वार्ड संख्या चार) में किच्छा बाईपास रोड पर खसरा संख्या 113, 115, 116 और 117 नजूल की जमीन में दर्ज है। इसका रकबा 281 बीघा चार बिस्वा है। इसी भूमि पर इकबाल सिंह ने कब्जा कर खेती शुरू कर दी। अवैध कब्जे के विरुद्ध नगर पालिका ने 1977-78 में बेदखली वाद संख्या 22/448 विहित प्राधिकारी/उप जिलाधिकारी न्यायालय में दाखिल किया गया था। यह वाद अभी तक विचाराधीन है। इससे पहले स्व. इकबाल सिंह ढिल्लो ने एसडीएम न्यायालय में 229 बी के तहत जमींदारी भू विनाश अधिनियम का वाद दाखिल किया था। एसडीएम ने 26 सितंबर 1984 को यह दावा निरस्त कर दिया। इसके बाद इकबाल सिंह ने 1985 में अपील संख्या 30 एसडीएम कार्यालय में दाखिल की। यह भी 1985 में निरस्त कर दी गई। इस आदेश के विरुद्ध इकबाल सिंह ने राजस्व परिषद इलाहाबाद में द्वितीय अपील संख्या 65, 1986-87 में प्रस्तुत की गई। राजस्व परिषद ने 26 दिसंबर 1990 अपील स्वीकार करते हुए कहा कि  वादी को भूमि हस्तांतरण का अधिकार नहीं होगा। इसे असंक्रमणीय भूमि घोषित कर दिया।
 राजस्व परिषद के आदेश के खिलाफ नगर पालिका ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वाद दायर किया। उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 1991 को अपने आदेश पर नगर पालिका के पक्ष में स्थगित कर दिया। इस आदेश के वाद विहित प्राधिकारी ने भी वाद को स्थगित कर दिया। पालिका ने राजस्व परिषद के आदेश के खिलाफ याचिका संख्या 4225 वर्ष 2001 नैनीताल उच्च न्यायालय में दाखिल की। इकबाल सिंह ने भी याचिका संख्या 4940 इसी वर्ष उच्च न्यायालय में दायर की। न्यायालय ने 2006 में इकबाल सिंह ढिल्लो के नाम संक्रमणीय भूमि दर्ज करने का आदेश दिया। निगम ने निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय 23 फरवरी 2007 को स्पेशल अपील संख्या 2716 दायर की। अपील को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया। साथ ही दोनों पक्षों को मुख्य राजस्व आयुक्त न्यायालय में उपस्थित होने व आयुक्त को चार माह में इसे निस्तारण करने को कहा। राजस्व परिषद व विहित प्राधिकारी न्यायालय में यह बाद अभी तक विचाराधीन है। दो न्यायालयों में वाद विचाराधीन होने के बावजूद यह जमीन साजिश के तहत राजवीर सिंह, सुखजिंदर पाल सिंह व गुरवचन सिंह पुत्र स्व. इकबाल सिंह ने जसदीप सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह के नाम दर्ज कर दी गई।
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दरअसल, एसडीएम विजय कुमार जोगदंडे करीब एक सप्ताह के अवकाश पर थे। इसी दौरान भू अध्यापित अधिकारी अनिल शुक्ला को एसडीएम का चार्ज मिला था। वर्षों से लटके भूमि विवाद को एक सप्ताह के भीतर ही शुक्ला ने समझकर 15 अप्रैल को चारों व्यक्तियों के नाम संक्रमणीय भूमिधरी दर्ज करने के आदेश दे दिए। जबकि एक वाद उनकी ही अदालत में विचाराधीन है।
उधर इस मामले की जांच कर रहे एडीएम नजूल आशीष भटगई का कहना है कि वह जिलाधिकारी के आदेश पर इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। फिलहाल भूमिधरी दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी गई है। 15 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी जाएगी। 
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