रुद्रपुर। उत्तराखंड की महिलाएं अब पारंपरिक खेती और मजदूरी से आगे बढ़कर अपनी कला के दम पर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। हल्द्वानी के हल्दूपोखरा गांव की महिलाएं कोकून रेशम के जरिए केदारनाथ, बद्रीनाथ और नीम करोरी बाबा जैसी दिव्य आकृतियां उकेर कर महीने का एक लाख रुपये तक कमा रही हैं। रुद्रपुर में चल रहे सरस मेले में इन महिलाओं के स्टॉल पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
देवी मां स्वयं सहायता समूह'''''''' की सदस्य कविता ऐरी ने बताया कि उनके इस सफर की शुरुआत तीन साल पहले महज 50 हजार रुपये के ऋण के साथ हुई थी। रेशम के अंडों (कोकून) से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का यह प्रयोग आज एक बड़े कारोबार में बदल चुका है। उनके समूह में वर्तमान में आठ महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
महिलाएं रेशम से देवी देवताओं की आकृतियों के अलावा, सजावटी सामान, पहाड़ की कला संस्कृति की आकृतियां तैयार कर उन्हें मढ़वाकर बेंच रही हैं। बताया कि 12 बाई 12 की एक सीनरी बनाने में करीब 1500 रुपये की लागत आती है। वहीं इसकी बिक्री तीन से चार हजार रुपये में हो जाती है। कविता कहती हैं कि शुरुआत के दिनों में तो उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा लेकिन बाद में उन्हें बड़े आर्डर मिलने लगे। अभी हाल ही में समूह की महिलाओं को पांच लाख रुपये का आर्डर मिला है। इसमें बाबा केदारनाथ की एक बड़ी सीनरी बनाई जानी है।