तराई का द्वार कहे जाने वाले रुद्रपुर शहर के विकास के लिए यूं तो बहुत सी घोषणाएं हुईं, लेकिन धरातल पर कोई भी घोषणा नहीं उतर पाई। मुख्यमंत्री हरीश रावत को जहां घोषणाओं का सीएम कहा जाता है, वहीं एनडी तिवारी की भी कई घोषणाएं सिर्फ हवा-हवा ही रहीं। यही कारण रहा कि घोषणाओं की आंधी में रुद्रपुर का आईएसबीटी भी उड़ गया।
शहर के मास्टर प्लान में रुद्रपुर का आईएसबीटी भी शामिल था। नारायण दत्त तिवारी ने रुद्रपुर के लिए मेडिकल कालेज, ट्रांसपोर्टनगर और अंतरराज्जीय बस अड्डे को अपनी प्राथमिकता में रखा था। उस समय रुद्रपुर के तत्कालीन विधायक और स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने भी शहर की सूरत बदलने के लिए कई प्लान तैयार किए, उसमें बेहड़ ने आईएसबीटी को भी अपनी प्राथमिकता में रखा, लेकिन सरकारी तंत्र की हीलाहवाली और सरकारों के ‘आया राम गया राम’ के चलते रुद्रपुर के विकास का ढांचा सिर्फ हवाहवाई ही रहा।
कार्यशाला को हटाकर बन सकता है आईएसबीटी
रुद्रपुर बस अड्डे से लगी रोडवेज की कार्यशाला को अगर अन्यत्र शिफ्ट किया जाए तो यहां पर अंतरराज्जीय बस अड्डे का सपना जल्द पूरा हो सकेगा। तराई बीज विकास निगम के चेयरमैन और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ का कहना है कि उन्होंने अपने स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल में यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा था कि अगर बस अड्डे से लगे रोडवेज वर्कशॉप को यहां से हटा दिया जाए तो आईएसबीटी के लिए पर्याप्त जमीन है। सिर्फ बिल्डिंग बननी है। बेहड़ के मुताबिक वर्कशॉप को शहर से बाहर कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है।
कैबिनेट में भी पास हुआ था आईएसबीटी
अंतरराज्जीय बस अड्डे के लिए कुमाऊं के चार शहरों में प्रस्ताव दिया गया था। एनडी तिवारी सरकार के समय कैबिनेट में कुमाऊं का आईएसबीटी हल्द्वानी, काशीपुर, रामनगर और रुद्रपुर में से एक जगह तय करना मंजूर हुआ था, लेकिन आखिर कहां आईएसबीटी पर ब्रेक लगा यह एक बड़ा सवाल है।
वर्तमान रोडवेज परिसर में काफी जमीन है, जो कि आईएसबीटी के लिए पर्याप्त है। यहां पर सिर्फ मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तैयार करनी है। रोडवेज की कार्यशाला को शहर से बाहर कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है, क्योंकि यह जमीन परिवहन विभाग की है, इसमें कोई विवाद जैसी स्थिति नहीं है। -डा. पंकज कुमार पांडेय, जिलाधिकारी, ऊधमसिंह नगर