परिवहन निगम ने सड़क दुर्घटनाओं में लगाम लगाने के लिए नई कोशिश शुरू की है। निगम के बेड़े में आई नई बसों में इलेक्ट्रानिक डिवाइस का इस्तेमाल किया गया है। इसके चलते चालक चाहकर भी बसों को 75 किलोमीटर से अधिक स्पीड से नहीं दौड़ा सकेंगे।
रोडवेज की बसें कई बार ज्यादा स्पीड की वजह से दुर्घटनाग्रस्त होती हैं। मंजिल पर जल्दी पहुंचने की होड़ में कई बार चालक 100 किलोमीटर से अधिक स्पीड से बसों को दौड़ा देते हैं। स्टेयरिंग पर नियंत्रण खोने की वजह से हादसे घट जाते हैं। कई बार निर्देशों के बावजूद चालक बसों को तेज गति से दौड़ाने की आदतों से बाज नहीं आते हैं।
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अब निगम ने बसों की स्पीड को नियंत्रित करने का काम किया है। निगम ने नई खरीदी बसों में स्पीड कंट्रोल इलेक्ट्रानिक डिवाइस लगवाई है, जिसको स्टेयरिंग पास लगे स्विच से जोड़ा गया है। डिवाइस बसों की गति को नियंत्रित करने का काम करता है। चालक 75 किलोमीटर की स्पीड से ऊपर बस को नहीं दौड़ा सकता है। डिवाइस में दर्ज गति पर बस के पहुंचने पर एक्सीलेटर काम नहीं करेगा। नई बसों को साउंड सिस्टम, पीली लाइटों के अपेक्षा एलइडी सफेद लाइटों से लैस किया गया है।
बस में ऑक्सीजन सिलेंडर, फ्रंट शीशे के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन लगाई गई है। डिपो के वर्कशॉप मैकेनिक इंचार्ज मोहम्मद यामीन ने बताया कि डिपो को मिली 9 बसों में स्पीड कंट्रोल इलेक्ट्रानिक डिवाइस सिस्टम लगा है। अन्य नई बसों में भी सिस्टम लगाया गया है। जिससे चालक 75 किलोमीटर की स्पीड से ऊपर बस नहीं दौड़ा सकता है। इससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लगेगा। उन्होंने तर्क दिया कि नए सिस्टम से राजस्व को घाटा होगा। अन्य राज्यों की रोडवेज बसों में ये सिस्टम नहीं है। इससे उनके चालक तेज गति का फायदा उठाकर पहले बस अड्डों में पहुंचकर सवारियां ले जाएंगे।
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