प्रशासन द्वारा धरना प्रदर्शन रोकने के लिए लगाई धारा 144 को चुनौती देते हुए रिचा फैक्ट्री के चार श्रमिकों ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इनके समर्थन में 4 महिलाएं 24 घंटे के क्रमिक अनशन पर बैठी रही।
प्रशासन ने श्रमिकों को एसडीएम कार्यालय परिसर में धरने देने से रोकने के लिए धारा 144 लागू कर दी थी। लिहाजा श्रमिकों ने प्रशासन की मंशा पर पानी फेरते हुए एसडीएम आवास से लगे मिनी पार्क में आमरण अनशन शुरू कर दिया।
शुक्रवार को करीब 12 बजे रिचा श्रमिक संगठन के दर्जनों सदस्य ट्रैक्टर से भर कर आए। हाथों में लाल झंडा लिए नारे लगाते हुए मिनी पार्क में एकत्र हो गए। वहां पर सभा के बाद नीरज कुमार, दलीप ठाकुर, सुमन भगत और राजेश कुमार के आमरण अनशन पर अनशन करने की घोषणा की।
माधुरी मिश्रा, सुनीता देवी, पार्वती देवी, शोभा देवी ने आमरण अनशन में 24 घंटे बैठने की घोषणा की। इसी दौरान वक्ताओं ने रिचा प्रबंधन पर श्रमिकों ने शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाकर नारेबाजी की। संगठन के अध्यक्ष बलदेव सिंह ने कहा कि मांगें न मानने तक आंदोलन जारी रहेगा।
इसका श्रमिकों ने नारेबाजी के साथ समर्थन किया। हैरत वाली बात तो यह रही कि चुनौती देने वाले इस आंदोलन के प्रति प्रशासन का रुख नरम रहा। मौके पर न तो एसडीएम मौजूद थे और न ही पुलिस। इस मौके पर योगेश पांडे, अजय कुमार, अरूण कुमार, देवेंद्र पांडे, मनप्रीत, बलदेव सिंह आदि मौजूद थे।
यूनियन के अड़ियल रुख पर वार्ता नहीं हुई
एसडीएम ने रिचा प्रबंधकों एवं श्रमिक नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता स्थल पर आते ही एसडीएम ने उनके आवास के पास आमरण अनशन शुरू करने के लिए नाराजगी जताते हुए धारा 144 का उल्लंघन बताया। यूनियन के नेताओं ने कहा कि वह सभी बर्खास्त श्रमिकों को काम पर वापस लेने की मांग पर अडिग हैं।
जबकि प्रबंधक 6 महीने के लिए कंपनी की ही दूसरी फैक्ट्री में काम करने पर सभी 6 कर्मचारियों को वापस लेने के लिए तैयार था। इसी दौरान एसडीएम ने तत्काल मिनी पार्क से धरना हटाने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस बुला ली। जिस पर सभी कर्मचारी वार्ता छोड़कर लौट गए।
रिचा श्रमिक धरना स्थल बदलने को तैयार
रिचा श्रमिकों ने एसडीएम आवास के पास मिनी पार्क में धरना और आमरण अनशन शुरू किया था। श्रमिक पहले तो स्थान बदलने को तैयार नहीं हुए लेकिन जब एसडीएम ने कड़ा रूख अपनाया तब वह धरना आमरण कार्यक्रम स्थल बदलने को तैयार हो गए। लेकिन मजदूर नेताओं के स्थान बदलने के निर्णय से खुश नजर नहीं आ रहे थे। समाचार लिखे जाने तक स्थल नहीं बदला गया था।