काशीपुर। रोजगार की तलाश में सात समंदर पार जाने वाले भारतीयों के कदम अब वतन की ओर बढ़ने लगे हैं। भारत में तेजी से विकसित होते स्टार्टअप इको सिस्टम और बढ़ते अवसरों ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को घर लौटने के लिए प्रेरित किया है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड और यूपी सीमा से सटे तराई क्षेत्र के 40,000 से अधिक युवा विदेशों से लौटकर देश में अपना स्टार्टअप शुरू कर चुके हैं।
तराई के प्रमुख शहरों में काशीपुर, बाजपुर, जसपुर, गदरपुर और सुल्तानपुर पट्टी समेत यूपी के ठाकुरद्वारा व अफजलगढ़ क्षेत्रों से हर साल हजारों युवा बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में करीब 1.27 लाख युवा बाहर गए जिनमें से 50 फीसदी% छात्र थे। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इनमें से 30 फीसदी युवा अब वापस आकर उद्यमिता की राह चुन रहे हैं।
इमिग्रेशन विशेषज्ञ सनमीत कौर के अनुसार यह बदलाव एक बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलाव का संकेत है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं। उन्होंने बताया कि मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों ने भारत को मैन्युफैक्चरिंग व आईटी हब बना दिया है। इसके अलावा बेहतर जीवन स्तर के साथ परिवार और मातृभूमि से लगाव युवाओं को खींच ला रहा है। सनमीत कौर के अनुसार युवा अब केवल नौकरी नहीं करना चाहते बल्कि विदेश में अर्जित पूंजी से अपना काम शुरू कर स्थानीय लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
सफलता की कहानी : विदेश से लौटकर लगाई वैदिक चक्की
काशीपुर के महादेव नगर (कुंडेश्वरी) निवासी हरप्रीत सिंह इस बदलाव की जीती-जागती मिसाल हैं। 2009 में काम की तलाश में इटली गए हरप्रीत ने वहां कई साल संघर्ष किया और पैसा कमाया लेकिन मन में हमेशा स्वदेश लौटने की इच्छा रही। हरप्रीत सिंह का कहना है कि बाजार में बढ़ती मिलावट को देखकर मैंने शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार करने की ठानी। काफी अध्ययन के बाद मैंने अपनी जमीन पर वैदिक चक्की स्टार्टअप शुरू किया। आज मैं संतुष्ट हूं कि अपने देश में शुद्धता के मिशन पर काम कर रहा हूं।
प्रमुख गंतव्य और वापसी का डेटा
भारतीय युवा मुख्य रूप से रूस, जर्मनी, फ्रांस, यूके, इटली, अमेरिका, कनाडा और यूएई जैसे देशों में पांच से सात साल नौकरी करते हैं और फिर वहां की पूंजी से भारत में निवेश कर रहे हैं।
वर्ष विदेश जाने वाले वापस लौटने वाले
2019 20,000 7,000
2022 28,000 7,500
2023 31,000 8,000
2024 27,000 8,500
2025 23,000 9,000
I(नोट: वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण आवाजाही बाधित रही। डेटा इमिग्रेशन एजेंसियों के अनुसार।)I