पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में अनुसंधान, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तीन करारों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों से पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान, खाद्य प्रणालियों, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण, शोध एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। कुलपति डॉ. शिवेंद्र कश्यप ने कहा कि विवि का उद्देश्य शोध को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए नवाचार एवं ज्ञान के प्रभावी हस्तांतरण को बढ़ावा देना है। इन तीनों एमओयू के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान, खाद्य प्रणाली, प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे।
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एमओयू - 1
पहला करार द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) नई दिल्ली के साथ किया गया। इस पर निदेशक शोध डॉ. एसके वर्मा, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. पीके सिंह और टेरी की ओर से महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत पर्वतीय कृषि, बदलती जलवायु अनुकुल कृषि एवं टिकाऊ खेती के लिए आवश्यक शोध किए जाएंगे। साथ ही विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों का आपस में आदान प्रदान और कृषि के क्षेत्र में नए स्टार्ट अप को बढ़ावा दिया जाएगा।
एमओयू - 2
दूसरा करार सोल ट्रेक प्रा.लि. देहरादून के बीच हुआ। इस पर सोल ट्रेक निदेशक कनिका रावत व डॉ. विजय प्रताप सिंह रावत ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत पारंपरिक और स्थानीय खाद्य प्रणाली, स्वदेशी ज्ञान, सामुदायिक प्रशिक्षण, महिला-केंद्रित और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप के क्षेत्र में सहयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक खाद्य प्रथाओं व स्थानीय ज्ञान को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करते हुए आमजन तक पहुंचाना है।
एमओयू - 3
तीसरा करार विवि फार्म और ओराइजो राइस घर एग्रोवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के बीच हुआ। यह करार लुप्तप्राय तिलक चंदन चावल की किस्म के पुनरुद्धार, खेती और व्यावसायीकरण पर हुआ। इस पर विवि फार्म के सीजीएम डॉ. राजेश प्रताप सिंह और ओराइजो की ओर से सह-संस्थापक डॉ. कौशल जायसवाल ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत 50 एवं 60 के दशक में प्रचलित सुगंधित धान की प्रजाति तिलक चंदन की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने, तिलक चंदन चावल को फिर घर-घर तक पहुंचाना अपेक्षित है।