सितारगंज। नेशनल हाइवे भूमि अधिग्रहण घोटाला प्रकरण में फर्जीवाड़ा कर कृषि से अकृषक भूमि दर्ज करा करोड़ों रुपए हड़पने के मामले में अहम साजिशकर्ता दो पटवारियों समेत तीन कर्मचारियों पर प्रशासनिक अफसर मेहरबान हैं। घोटाले की जांच में राजस्व अहलमद ने बयानों में 2011-12 की मिशलबंद पंजिका में दो पटवारियों के डरा धमकाकर दबाव बनाने के कारण सात पत्रावलियां दर्ज करना स्वीकार किया। पुलिस ने राजस्व अहलमद के खिलाफ तो मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन, एसडीएम ने फर्जीवाड़े के मुख्य साजिशकर्ता दो पटवारियों को बचा लिया। इस कारण उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। आरके ने चार दिन पहले दी तहरीर पर कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एसडीएम विनोद कुमार की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने रविवार को उनके कार्यालय के राजस्व अहलमद संतराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। उन पर मिशलबंद पंजिका में दर्ज बैकडेट की प्रविष्टियों को फाड़ने, छेड़छाड़ कर साक्ष्य छिपाने की धारा 218/420/467/468/471, 477 (क) आईपीसी का आरोप है। एसडीएम ने तहरीर में बताया कि 16 मार्च को जिला कार्यालय में एनएच 74, 125 के मुआवजा वितरण में अनियमितताओं की जांच कर रही कुमाऊं आयुक्त द्वारा गठित समिति ने उनके अधीनस्थ कर्मचारी को बुलाकर पूछताछ की। पूछताछ में पता चला कि मिशलबंद पंजिका के पृष्ठ संख्या 25, 42, 61, 64, 72, 73, 74, 77 में कूटरचना एवं छेड़छाड़ कर पंजिका के निचले हिस्से को फाड़ दिया गया है।
अगले दिन एसडीएम विनोद कुमार ने अपने कार्यालय में राजस्व अहलमद संतराम से पूछताछ की। इसमें उसने 2011-12 की मिशलबंद पंजिका से छेड़छाड़, पृष्ठों को फाड़ना स्वीकार किया लेकिन, राजस्व अहलमद ने इस मामले में बयान दर्ज कराते वक्त घटना में फर्जीवाड़ा करने के अहम साजिशकर्ता दो पटवारियों किच्छा खुशाल सिंह, सितारगंज के राम अवतार के नाम भी उजागर किए। जिन्होंने अप्रैल 2016 में संतराम से विभिन्न गांवों की कृषि भूमि को 2011-12 की मिशलबंद पंजिका में बैकडेट में दर्ज कराने का दबाव बनाया। दोनों पटवारी वर्ष 2012 में कार्यरत एसडीएम के आदेश, परवाना, घोषणा पत्रों एवं संपूर्ण पत्रावली हस्ताक्षर सहित सात पत्रावलियां लाए और धमकाकर जबरन दर्ज करवाई।
इन पत्रावलियों के परवाने भी वह स्वयं लेकर गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में राजस्व अलहमद को पूरी तरह से दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कोतवाली में मुकदमा तो दर्ज करा दिया लेकिन, बयानों से उजागर पटवारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई जबकि, मुख्य साजिशकर्ता पटवारी हैं। 17 मार्च को तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो ने 6-आर में तहसील के कंप्यूटर ऑपरेटर अरुण कुमार दुबे ने फर्जीवाड़ा करने की तहरीर दी थी लेकिन, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों की माने तो ये तीनों कर्मचारी अधिकारियों के चहेते बताए जाते हैं। इन्हें अधिकारी बचाने में लगे हैं।
सितारगंज। फर्जी तरीके से कृषि भूमि को अकृषि बनाने के लिए तहसील का कंप्यूटर ऑपरेटर ही तहसीलदार बन गया। रजिस्ट्रार कानूनगो ने एसडीएम के माध्यम से 17 मार्च को कोतवाली में जो तहरीर दी। उसमें बताया गया कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में डाले बिना कंप्यूटर ऑपरेटर ने 2012 की आर-6 में फर्जीवाड़ा कर 2016 में बैकडेट से कृषि से अकृषि भूमि दर्ज करने के आदेशों की एंट्री कर दी जबकि, यह अधिकार तहसीलदार को होता है।
तहसीलदार ने कंप्यूटर ऑपरेटर को अपनी आईडी का पासवर्ड दिया है। इसका फायदा उठाते हुए ऑपरेटर ने गड़बड़ी कर दी। इस बारे में पुलिस ने बताया कि आरके की तहरीर नहीं ली गई थी। एसडीएम की मोहर लगी होने और तहरीर आरके की ओर से होने के कारण उसे वापस कर दिया गया था जबकि, आरके ने बताया कि मुकदमा दर्ज करने के लिए दी गई तहरीर वापस नहीं ली गई है।
सितारगंज। हाइवे से जुड़ी क्षेत्र में फर्जी तरीके से कृषि भूमि को अकृषि दर्शाने के और भी कई मामले हो सकते हैं। सितारगंज से खटीमा तक सड़क चौड़ीकरण में तकरीबन 117.664 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। जिसमें 78.05 हेक्टेयर भूमि पर ही एनएचएआई के माध्यम से कब्जा मिला है। अधिग्रहित भूमि में कृषि भूमि का मुआवजा चार गुना और आवासीय भूमि का दो गुना मुआवजा बांटा जा रहा है।
सात मामले तो पकड़ में आ गए हैं। अगर, सितारगंज से खटीमा तक कृषि भूमि से अकृषि में दर्ज 2011 से लेकर 2016 तक की सभी फाइलों की जांच की गई तो और भी ऐसे मामले सामने आएंगे। तमाम ऐसी जमीनें निकलेंगी। इन्हें अकृषि घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में उस पर खेती हो रही है।
सितारगंज। सोमवार को रुद्रपुर में कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने सात प्रकरणों में घोषित अकृषि जमीनों की खसरा खतौनी भी तलब की। इनका अवलोकन किया जा रहा है। अगर, कृषि जमीन है तो वह अकृषि कैसे दर्ज हुई। सूत्र बताते हैं कि आयुक्त द्वारा जिन अकृषि जमीन पर खेती हो रही है, उनकी भी जांच कराई जा सकती है।
सितारगंज। क्षेत्र में धारा 143 के मामलों में फर्जीवाड़े के सात मामलों में धोखाधड़ी कर मुआवजा लेने वाले किसानों पर भी गाज गिर सकती है। माना जा रहा है कि पटवारियों ने किसानों से सांठगांठ कर 143 कराई थी। इससे यह किसान भी लपेटे में आ सकते हैं और करोड़ों के घोटाले की आरोपी अधिकारी, कर्मचारी, किसानों से रिकवरी भी कराई जा सकती है।