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राधेहरि कॉलेज में टीम ने खंगाले दस्तावेज

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काशीपुर। राधेहरि राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य के निलंबन के मामले की जांच के लिए दो सदस्यों की टीम ने बृहस्पतिवार को फिर से महाविद्यालय पहुंचकर दस्तावेज खंगाले। पांच घंटे तक पड़ताल करने के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार की है।
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दरअसल, वर्ष 2017-18 में राधेहरि राजकीय महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अर्जुन सिराड़ी ने महाविद्यालय में विभिन्न कार्यों का भुगतान कॉशनमनी करने के साथ ही फर्जी बिल बनवाने, एमआरपी से अधिक मूल्य पर पुस्तकों की खरीद फरोख्त समेत कई कार्य अपने स्तर से कर दिए। यह कार्य निदेशालय की अनुमति के बिना लंबे समय तक चलते रहे। मामला पकड़ में आने पर निदेशालय से जांच बैठा दी गई। मामले में निदेशालय की टीम ने प्राचार्य पर लगे आरोपों की जांच की। इसके बाद राज्यपाल के आदेश पर अपर मुख्य सचिव ने आठ जनवरी 2018 को प्राचार्य को निलंबित कर दिया था।
इसके बाद निदेशालय की टीम दो बार महाविद्यालय पहुंचकर प्राचार्य पर लगे आरोपों की गहनता से जांच कर चुकी है। इस दौरान तत्कालीन प्राचार्य के कार्यकाल में की गई पुस्तकों की खरीद फरोख्त समेत विभिन्न मामलों के दस्तावेज खंगाल चुकी है।
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बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे डॉ. आरके गुप्ता प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय गोपेश्वर और डॉ. पीके पाठक प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रानीखेत महाविद्यालय पहुंचे। टीम ने प्राचार्य डॉ. चंद्रराम की मौजूदगी में कॉशनमनी प्रपत्रों, महाविद्यालय में हुए कार्यों के बिल बाउचर, कालिख पुती पुस्तकों आदि की जांच की।
इन आरोपों में हुआ था निलंबन
1- पुस्तकों का क्रय, झाड़ी कटान, सिविल कार्य, खेल सामग्री का क्रय कौशनमनी मद से करीब 14 लाख का भुगतान करने।
2- उक्त सभी कार्य निदेशालय की अनुमति के बिना अपने ही स्तर से करना।
3- उक्त कार्यों के प्रयोजनों के लिए फर्जी बिल बनाना।
4- महाविद्यालय स्तर पर विभिन्न क्रय समितियां गठित होने पर भी प्रकरण समितियों के संज्ञान में न लाया जाना।
5- क्रय समितियों के गठन में भी चुनिंदा शिक्षकों को ही रखा जाना।
6- करीब 1500 पुस्तकों के एमआरपी को स्थायी स्याही से छुपाया जाना, एमआरपी से अधिक दामों पर पुस्तकों का क्रय किया जाना।
7- डॉ. सिराड़ी की ओर से महाविद्यालय हित में कार्य न करना एवं गई प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त होने पर निलंबित किया गया था।
कोट:
तत्कालीन प्राचार्य पर लगे आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम आई थी। टीम ने कौशनमनी, कालिख पुती पुस्तकें, बिलों समेत विभिन्न दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की। - डॉ. चंद्रराम, प्राचार्य, राधेहरि राजकीय महाविद्यालय काशीपुर।
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