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Exclusive: DM को गफलत में रख तत्कालीन DFO ने राशन विक्रेताओं को दिलाई क्लीन चिट, 23 दिन बाद बैकफुर पर प्रशासन

Tue, 23 Jul 2024 12:23 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

किच्छा में हुए राशन घोटाले के मामले में तत्कालीन डीएसओ मामले में खुद आरोपी होने के बावजूद अधिनस्थों से जांच कराने और गलत आख्या तैयार कर डीएम से दस्तखत कराने पर घिर गए हैं। 
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Scam - फोटो : Freepik
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विस्तार
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किच्छा में हुए राशन घोटाले के मामले दिलचस्प मोड़ आ गया है। तत्कालीन डीएसओ मामले में खुद आरोपी होने के बावजूद अधिनस्थों से जांच कराने और गलत आख्या तैयार कर डीएम से दस्तखत कराने पर घिर गए हैं। डीएम ने अनियमितता करार देते हुए मुख्य सचिव को तत्कालीन डीएसओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की संस्तुति की है। डीएम ने पूर्व में भेजी जांच आख्या का संज्ञान नहीं लेने और नई गठित समिति की जांच आख्या भेजने का पत्र शासन को भेजा है।

दरअसल वर्ष 2020 में सामाजिक कार्यकर्ता निखिलेश घरामी ने किच्छा के 12 राशन डीलर पर अधिकारियों से सांठगांठ कर कई क्विंटल राशन का गबन करने का मामला उठाया था।उपायुक्त खाद्य ने मामले की जांच की थी और तत्कालीन डीएसओ, किच्छा के पूर्ति निरीक्षक, 12 राशन डीलर से वसूली की संस्तुति की थी। इसके बाद दिसंबर 2022 में किच्छा एसडीएम ने जांच कर 4059 क्विंटल खाद्यान्न के घोटाले की संस्तुति की थी। एक डीलर की मौत हो गई थीं एसडीएम ने 11 राशन डीलर के एक करोड़ नौ लाख, तत्कालीन डीएसओ से आठ लाख 42 हजार और पूर्ति निरीक्षक से आठ लाख 42 हजार की वसूली की संस्तुति की गई थी।

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इस दौरान डीएसओ श्याम आर्या को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन कुछ समय पहले वे फिर से जिले में आ गए थे। इधर किच्छा के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक ने रिकवरी की राशि जमा कर दी थी। लेकिन दूसरे आरोपियों से रिकवरी नहीं होने पर वे हाई कोर्ट चले गए थे। कोर्ट के आदेश पर उनको जिले से हटा दिया गया था। इधर अब इस मामले में नया मोड़ आया है।

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डीएम ने इस मामले को लेकर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि 29 जून को किच्छा के राशन डीलर पर लगाए जुर्माने का कोई आधार नहीं होने की आख्या भेजी गई थी। उन्होंने पूरी पत्रावली का अध्ययन किया गया था। इसमें सामने आया कि तत्कालीन डीएसओ श्याम आर्या ने खुद एक जांच आख्या तैयार कर अपने अधीनस्थ कार्मिकों को दबाव में लेकर उनके सामने रखी थी। इस पर हस्ताक्षर करने वाले दो कार्मिकों के द्वारा लिखित रूप में भी इसकी जानकारी दी गई है। श्याम आर्या प्यार मामले में आरोपी हैं। ऐसे में उनकी ओर से अपने अधीनस्थ कार्मिकों से जांच करवाया जाना न्यायोचित नहीं है। इस मामले में भेजी गई आख्या का संज्ञान न लिया जाए और इस आख्या पर कोई भी निर्णय न लिया जाए। उन्होंने पूरे मामले में जांच के लिए कमेटी गठित की है। इस कमेटी की पूरी जांच आख्या मिलने पर उसे भेजना जायेगा। उन्होंने तत्कालीन डीएसओ श्याम आर्या की ओर से प्रकरण में गलत जांच l आख्या उनके सामने रखना और अनाधिकृत रूप से अधीनस्थ कार्मिकों को दबाव में लेकर पत्रावली बनाया जाना अनियमितता की श्रेणी में आता है। उन्होंने श्याम आर्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति की है।

तत्कालीन डीएसओ ने गलत जांच आख्या तैयार कर उनसे दस्तखत कराए थे, जो गलत था। वे इस प्रकरण में खुद ही आरोपी हैं। इस कृत्य पर उनके खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति की गई है। इसके साथ नए सिरे से जांच के लिए समिति को अधिकृत किया गया है। समिति की रिपोर्ट मिलने पर उसे शासन को भेजा जाएगा।

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- उदयराज सिंह, डीएम

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