सत्तारूढ़ भाजपा ने नगर निगम चुनाव के मेयर पद पर एलआईसी में कार्यरत रहे रामपाल सिंह पर भरोसा जताया है। सियासी गलियारे में नये चेहरे रामपाल की आरएसएस की पृष्ठभूमि टिकट दिलाने में मददगार रही। भाजपा आलाकमान ने टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं को किनारे कर रामपाल पर दांव खेलकर पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौंका दिया है।
दरअसल रुद्रपुर नगर निगम की सीट अनुसूचित जाति घोषित होने के बाद टिकट की दौड़ में आधा दर्जन नेताओं के नाम चर्चाओं में थे। दो नेताओं की पैरवी में दो विधायक जोरशोर से जुटे हुए थे। लेकिन दो दिन पहले से अचानक शक्तिविहार कॉलोनी के रहने वाले रामपाल का नाम तेजी से उभरने लगा। अचानक रामपाल के नाम की चर्चा तेज होने से कईं भाजपाइयों के साथ टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों की भी नींद उड़ गई थी।
आरएसएस के साथ ही भाजपा के कुछ दिग्गजों ने रामपाल का नाम आगे बढ़ाया और स्वच्छ छवि का हवाला देते हुए टिकट के लिए दमदार पैरवी की थी। इसी पैरवी के चलते रामपाल का टिकट पक्का माना जा रहा था और सोशल मीडिया में टिकट मिलने के कयास भी लगाए गए थे। लेकिन भाजपा के दूसरे दावेदारों की यकी नहीं था कि हाईकमान नए चेहरे पर भी दांव चल सकता है, लेकिन पिछले नगर निगम के चुनाव की तरह ही इस बार भी भाजपा ने नए चेहरे पर भरोसा जता दिया।
हाईकमान ने साफसुथरी छवि वाले रामपाल को टिकट देकर अन्य दावेदार और नेताओं को जरूर चौंका दिया है। भाजपा की असल चुनौती पूरे कुनबे को एक साथ लेकर जनता का भरोसा जीतने की होगी। इधर घोषित प्रत्याशी रामपाल ने बताया कि अब इससे पहले राजनीति से नहीं जुड़े थे। चुनाव उनके नए सियासी भविष्य के लिए भी बड़ी परीक्षा होगी।
नजूल ने फेरा कइयों के अरमानों पर पानी
रुद्रपुर। नजूल पर कब्जे को लेकर कईं दावेदारों के अरमानों पर पानी फिरा है। यह केवल भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस के पार्षद, मेयर के दावेदारों के साथ भी हो रहा है। नजूल का इतना खौफ है कि भाजपा हाईकमान को मेयर का टिकट फाइनल करने के लिए नजूल पर भी खास ध्यान रखना पड़ा। टिकट के दो मजबूत माने जाने वाले दावेदार नजूल की वजह से ही टिकट की दौड़ से बाहर हो गए। बीते कुछ समय से टिकट की तैयारी कर रहे एक दावेदार ने नजूल की भूमि पर स्थित भवन तो बेच दिया था, मगर उसका हाउस टैक्स ट्रांसफर नहीं होने की वजह से वह दौड़ से अंतिम समय में बाहर हो गया। यही हाल एक दावेदार का था, जो अंतिम समय तक नजूल पर काबिज नहीं होने का भरोसा हाईकमान को दिलाने में नाकाम रहा।
मेयर बनने के लिए छोड़ी एलआईसी की नौकरी
रुद्रपुर। भाजपा के मेयर पद के दावेदार रामपाल वर्ष 1993 से भारतीय जीवन बीमा निगम की रुद्रपुर शाखा में सेल्स सहायक हैं। लेकिन मेयर का टिकट फाइनल होने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त रामपाल ने बीते 18 अक्तूबर को पद इस्तीफा दे दिया था। रामपाल सात भाई बहन हैं और इनकी पत्नी अंजू सिंह गृहणी हैं। उनका एक बेटी और एक बेटी हैं। रामपाल ने बताया कि वर्ष 1996 में पीसीएस क्वालीफाई करने के बाद उनका चयन एडीओ कोऑपरेटिव पद के लिए हो गया था। लेकिन उन्होंने ज्वाइनिंग नहीं की थी। वे सालों से आरएसएस के अलावा भारत विकास परिषद सहित अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे हैं।
भाजपाइयों ने टिकट मिलने पर दी रामपाल को बधाई
रुद्रपुर। सत्तारूढ़ भाजपा से रामपाल सिंह का टिकट फाइनल होने के बाद भाजपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्य बाजार में एकत्र भाजपाईयों ने घोषित प्रत्याशी रामपाल को माला पहनाकर बधाई दी। सभी ने एकजुट होकर रामपाल को चुनाव लड़ाकर जीत दिलाने का संकल्प लिया। वहां पर भाजपा नगर अध्यक्ष हरीश सुखीजा, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश परिहार, गुरमीत सिंह, भारत भूषण चुघ, संजय ठुकराल, महेश अग्रवाल, रोहित मित्तल, विपिन भाटिया, किरन विर्क, विजय फुटेला सहित अनेक मौजूद रहे।
नाम- रामपाल सिंह
जन्मतिथि- 30/03/1970
शिक्षा- एमए अर्थशास्त्र
निवास- शक्तिविहार कॉलोनी, जगतपुरा।
व्यवसाय- भारतीय जीवन बीमा निगम में सेल्स सहायक (चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी नौकरी)