काशीपुर। लॉकडाउन के दौरान घाटे से उबरने के लिए रेलवे ने कमर कस ली है। रेलवे की बहु-अनुशासनात्मक विकास इकाई ने आय बढ़ाने के लिए माल की आवाजाही में रियायतों देकर व्यापारियों व उद्योग प्रतिनिधियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
रेल परिवहन ने वर्ष 2024 तक माल लदान को दोगुना करने के लिए इज्जतनगर मंडल पर बहु-अनुशासनात्मक विकास इकाई गठित की है। शुक्रवार शाम इकाई संयोजक एवं वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक अनूप सिंह के नेतृत्व में टीम ने माल लदान स्थलों हल्दी रोड रुद्रपुर सिटी और काशीपुर मालगोदाम का निरीक्षण किया। रेलवे स्टेशन पर टीम ने व्यापारियों और उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों के साथ सुझाव मांगे और माल के लदान में आ रही दिक्कतों पर चर्चा की। टीम ने व्यापारियों व उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से ज्यादा से ज्यादा माल का ढुलान रेल परिवहन से कराने की अपील की। रेल मंत्रालय ने व्यापारियों की सुविधा के लिए छोटी-छोटी माल गाड़ियों का भी संचालन किया जा सकता है। कहा कि रेलवे प्रशासन लक्ष्य प्राप्ति के लिए व्यापारियों को लदान स्थलों पर उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। ताकि व्यापारियों का रेलवे के प्रति सकारात्मक रुझान हो सके। वहां पर वरिष्ठ मंडल इंजीनियर समन्वय अखिलेश त्रिपाठी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीतू सिंह, नवीन कुमार सिंह, इफको कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी नीरज डोभाल, अल्ट्राटेक से अमिति कुमार शर्मा, व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रभात साहनी, सचिन अग्रवाल, आरपीएफ उपनिरीक्षक तरुण अत्री आदि थे।
माल लाने को लंबी दूरी की बाध्यता खत्म
काशीपुर। मुख्य वाणिज्य निरीक्षक ओमप्रकाश ने बताया कि रेलवे ने व्यापारियों को 2-पॉइंट रैक और मिनी रैक व्यवस्था में 500 किमी दूरी की बाध्यता खत्म कर दी है। अब लंबी दूरी के लिए भी माल लाने-ले जाने के लिए मालगाड़ी जा सकती है। लॉकडाउन होने के कारण खान-पान, पार्किंग, यात्री ट्रेन व मालगाड़ी नहीं चलने से रेलवे को करोड़ों रुपये की चपत लग चुकी है। काशीपुर जंक्शन पर एक महीने में सीमेंट, उर्वरक, कोयला लेकर 15-20 मालगाड़ी पहुंचती थी। लेकिन अब करीब 12 मालगाड़ी ही पहुंच पा रही है। लॉकउाडन में रेलवे की आय करीब तीन गुना गिर चुकी है।
प्लेटफार्म से आएदिन होता है सामान चोरी
काशीपुर। रेलवे जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर-9 पर मालगाड़ियों में खाद्यान सहित अन्य माल लदान होता है। माल लोड कराने के लिए प्लेटफार्म पर नियमित पेयजल, बिजली की व्यवस्था नहीं है। जब माल का लदान होता है तो तभी पानी व बिजली की व्यवस्था होती है। माला गाड़ियां जाने के बाद बिजली के बल्ब व अन्य वस्तुएं चोरी हो जाती है। टीम ने प्लेटफार्म पर नियमित व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया।