फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udham Singh Nagar News: मेडिकल कॉलेज में चार्ज को लेकर उठे सवाल, प्राचार्य ने एसोसिएट प्रोफेसर को सौंपी जिम्मेदारी

Sat, 14 Mar 2026 12:41 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की अनुपस्थिति के दौरान प्रशासनिक चार्ज को लेकर नया मामला सामने आया है। प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने छुट्टी पर जाने से पहले कॉलेज का चार्ज एक एसोसिएट प्रोफेसर को सौंप दिया था। तीन दिन बाद शुक्रवार को उन्होंने दोबारा कार्यभार संभाल लिया लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर को चार्ज दिए जाने का मामला चर्चा का विषय बना रहा।मेडिकल कॉलेज में उस समय पूर्व प्राचार्य, वरिष्ठ प्रोफेसर और अन्य अनुभवी अधिकारी भी मौजूद थे। ऐसे में अपेक्षा की जा रही थी कि प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ प्रोफेसर या अनुभवी अधिकारी को दी जाएगी। इसके बावजूद एसोसिएट प्रोफेसर को चार्ज सौंपे जाने पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज से जुड़े कुछ कर्मचारियों और चिकित्सकों का कहना है कि संस्थान जैसे बड़े प्रशासनिक ढांचे में चार्ज देने की प्रक्रिया सामान्यत तौर पर वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखकर की जाती है। ऐसे में जूनियर अधिकारी को यह जिम्मेदारी देने के पीछे क्या कारण रहे, इसको लेकर चर्चा बनी हुई है। चिकित्सा शिक्षा के विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि संस्थान में वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हों तो सामान्य परिस्थितियों में उन्हें ही जिम्मेदारी दी जाती है। हालांकि प्राचार्य का कहना है कि उस समय वरिष्ठ चिकित्सक अन्य कार्यों में व्यस्त थे, जिसके कारण तत्काल व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत हुई तो संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण भी लिया जा सकता है।
- वर्जन
ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि वरिष्ठ और योग्य अधिकारी की उपस्थिति में जूनियर को प्रमुख प्रशासनिक चार्ज दिया जाए। इस मामले की जानकारी ली जाएगी और आवश्यकता होने पर प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। - अजय आर्या, निदेशक चिकित्सा शिक्षा
विज्ञापन

- जिस दिन मुझे अवकाश पर जाना था उस समय डॉ. केएस शाही ऑपरेशन थिएटर में व्यस्त थे और डॉ. विनय कुमार भी अन्य कार्य में लगे थे। प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसलिए एसोसिएट प्रोफेसर को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी दी गई। ऐसी व्यवस्था पहले भी कई बार की जा चुकी है। - डॉ. उषा रावत, प्राचार्य
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें