नगर के व्यापारियों ने वाणिज्य कर वैट अधिनियम में किए संशोधन के खिलाफ वाणिज्य कर कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर अवनीश पांडे का घेराव कर उनके मार्फत वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने संशोधित कानून को काला कानून बताकर रद्द करने की मांग की।
इस कानूनों से न तो राजस्व में वृद्वि होगी और न ही व्यापारियों का हित होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून अंग्रेजों के समय से भी ज्यादा उत्पीड़ित है। यह कानून व्यापारियों की गर्दन वाणिज्य कर अधिकारियों के शिकंजे में कसने के लिए बनाया गया है। इस मौके पर नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष राजीव सेतिया, विकास मेहरोत्रा, योगेश अग्रवाल, पराग अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, योगेश विश्नोई, चंद्र मोहन, कमल सिंह, मोहम्मद नफीस, नरेंद्र पैगिया आदि थे।
वहीं वाणिज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष यशपाल सिंह ने कहा है कि इस संशोधन के पूर्व बिना सुनवाई के पारित किए गए एक पक्षीय कर निर्धारण निर्णयों को धारा 31 के द्वारा निरस्त करते हुए व्यापारी को दोबारा सुनवाई अवसर प्रदान किया जाता था। धारा 31 की समाप्ति पर यह सुविधा समाप्त नहीं हुई है, संशोधन के बाद अब दोबारा सुनवाई का अवसर ज्वाइंट कमिश्नर (अपील) के आदेश के बाद एक बार ही प्राप्त होगा।
इस प्रकार इस संशोधन से विधायिका की मंशा कर निर्धारण के कार्य में तेजी लाने और व्यापारियों को उत्पीड़न से बचाने की है। पूर्व में व्यापारी अपने एक पक्षीय पारित आदेश की सुनवाई के लिए बार बार कार्यालय आने को विवश थे और उनका कर निर्धारण लंबे समय तक अनावश्यक
खिंचता था। इस संशोधन से विधि का पालन करने वाले व्यापारी को अपने वाद की
सुनवाई के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने से निजात मिलेगी। उसका
कर निर्धारण नियमित रहेगा।