काशीपुर। इंडस्ट्री में होने वाले हादसों की रोकथाम और लोगों की सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से आईजीएल काशीपुर में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। इसे भारतीय रासायनिक परिषद (आईसीसी) और इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड (आईजीएल) ने संयुक्त रूप से ‘प्रक्रिया सुरक्षा प्रबंधन’ विषय पर आयोजित किया।
आईजीएल के सभागार में बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे से प्रक्रिया सुरक्षा प्रबंधन पर कार्यशाला शुरू हुई। इसमें खतरों की पहचान, हैजॉप अध्ययन, मात्रात्मक जोखिम विश्लेषण, प्रक्रिया सुरक्षा प्रबंधन और व्यवहार-आधारित सुरक्षा पर चर्चा की गई। इस दौरान आईसीसी नॉर्थ रीजन हेड और आईजीएल के सीईओ रूपाक सारस्वत ने कहा कि दुनियाभर में एक साल में लगभग 40 हजार लोग आतंकी हमलों में मारे जाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं में औसतन 65 हजार मारे लोग जाते हैं। इस पर चर्चा भी होती है। इंडस्ट्री और फैक्टरियों में काम करते वक्त मारे जाने वालों का आंकड़ा 28 लाख है।
इस पर कोई बात नहीं होती है। लाखों लोग कई बीमारियों से मारे जाते हैं। इस अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रोसेस सेफ्टी कितनी आवश्यक है।
जब कोई कैमिकल, ऊर्जा या मैटेरियल बनाते वक्त कंट्रोल खत्म हो जाता है, तो एक्सीडेंट होता है। इससे हमारे शरीर, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है लेकिन हम जब प्रोसेस को अच्छे से रन करते हैं, तो हम इन तीनों चीजों को बचाते हैं। इसलिए प्रोसेस सेफ्टी बेहद जरूरी है।
अन्य सदस्यों ने बताया कि प्रोसेस सेफ्टी मैनेजमेंट के तहत इंडस्ट्री में रिस्क को कम करने पर जोर दिया जाता है। हादसों का कारण पता लगाकर उसे रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने आदि पर ध्यान दिया जाता है। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रक्रिया सुरक्षा के वैश्विक मानकों को भारतीय उद्योगों में बढ़ावा देना और दुर्घटनाओं की रोकथाम के माध्यम से मानव जीवन की रक्षा करना है।
वहां पर सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक विपिन कुमार, आईजीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आलोक सिंघल, आईजीएल के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी देव झा, हेड सस्टेनेबिलिटी डॉ. आरके शर्मा, आईजीएल फैक्टरी मैनेजर आरके सिंह, सहायक महाप्रबंधक प्रशासन विक्रांत चौधरी, आईजीएल के लाइजनिंग प्रबंधक आरसी उपाध्याय सहित आईसीसी और सिडकुल के अधिकारी व अन्य लोग मौजूद रहे।