उत्तर प्रदेश के न्यायालयों से सिद्धदोष बंदी व कैदी अब उत्तराखंड की जेलों में नहीं रहेंगे। शासन से आदेश जारी होने के बाद दो दिन के भीतर संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) के 30 बंदियों को बरेली, इलाहाबाद और वाराणसी की जेलों में सिफ्ट किया गया है। यूपी के 61 बंदियों को आगरा, फतेहगढ़ व वाराणसी की केंद्रीय कारागार भेजा जाएगा।
संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में 144 बंदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इनमें से 89 बंदी उत्तर प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों से सिद्धदोष बंदी हैं। इसके अलावा केंद्रीय कारागार में यूपी के दो कैदी सजा काट रहे हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि 2012 में शासन से यूपी के कैदी व बंदियों को उत्तर प्रदेश की जेलों में सिफ्ट करने का आदेश हुआ था। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
जो हाईकोर्ट ने करीब तीन माह पूर्व खारिज कर दी। बताया कि कारागार विभाग से यूपी के कैदियों को उत्तर प्रदेश की जेलों में शिफ्ट करने का आदेश मिलने पर खुली जेल में उम्रकैद की सजा भोग रहे 89 बंदियों को बरेली, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद व फतेहगढ़ की जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है।
बताया कि 21 बंदियों को बरेली की केंद्रीय कारागार, छह बंदियों को इलाहाबाद की नैनी जेल व तीन बंदियों को वाराणसी की केंद्रीय कारागार में शिफ्ट कर दिया गया है। 61 बंदियों को पुलिस सुरक्षा मिलने पर आगरा व फतेहगढ़ की केंद्रीय कारागार भेजा जाएगा। इसके अलावा एक बंदी बाराबंकी जेल में गठित कमेटी में सजा माफी का आवेदन लेकर गया हुआ है। जिसे वहीं से सीधे वाराणसी की जेल में शिफ्ट करने की कार्रवाई की जा रही है। यूपी के बंदियों को राज्य की एकमात्र खुली जेल से उत्तर प्रदेश की सेंट्रल जेलों में भेजने से बंदियों में निराशा है।