सितारगंज के प्रहलाद पल्सिया गांव में बैगुल नदी से हो रहा भूमि कटाव।
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रिवर ट्रेनिंग के तहत बैगुल नदी को चैनेलाइज करने के बाद भी नदी का रुख नहीं बदला। नदी ने प्रहलाद पल्सिया गांव की ओर रुख कर लिया है, जिससे गांव की आबादी को खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा नदी से गांव के किनारे पर करीब 150 मीटर लंबाई में भूमि कटाव भी शुरू हो गया। इससे किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा रही है। ग्रामीणों ने सिंचाई ईई से मिलकर नदी में हो रहे कटाव को रोकने की मांग की। ईई ने नदी के कटाव को रोकने के लिए 8.50 लाख रुपये की लागत से वायरक्रेट के भीतर मिट्टी से भरे कट्टे लगाने का प्रस्ताव बनाया है।
उल्लेखनीय है कि मई में प्रशासन ने नदियों को चैनेलाइज करने के लिए बैगुल और कैलाश नदी में जमी सिल्ट हटाने को पट्टे जारी किए थे। 15 जून तक पट्टों के माध्यम दोनों नदियों में सिल्ट खुदान भी किया गया, लेकिन बैगुल नदी ने अपना रुख नहीं बदला और नदी किनारे बसा प्रहलाद पल्सिया गांव नदी के मुहाने पर आ गया है, जिससे गांव को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। नदी किसानों की कृषि योग्य भूमि में कटाव कर रही है, जिससे भूमि नदी में समाती जा रही है और नदी ग्रामीणों के घरों के समीप पहुंच चुकी है।
सोमवार को ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय राज से मिलकर नदी से हो रहे भूमि कटाव को रोकने की मांग की। ईई संजय राज ने बताया कि बैगुल नदी के किनारे करीब 150 मीटर लंबाई में नदी कटाव कर रही है, जिस पर 8.50 लाख की लागत से वायरक्रेट के भीतर मिट्टी भरे कट्टे लगाकर कटाव रोकने के लिए तटबंध बनाया जाएगा, जिसका प्रस्ताव एसडीएम विनोद कुमार को दिया जाएगा। बाढ़ आपदा मद से धनराशि अवमुक्त होते ही कार्य आरंभ करा दिया जाएगा।
बारिश से हुआ जलभराव
रविवार की मध्य रात से क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही बारिश जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। नगर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। नालियां चोक होने से वार्ड संख्या तीन, छह, सात व आठ में कई स्थानों पर पानी भर गया है। जिससे राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ी।