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जिले में पोस्ट कोविड ओपीडी की सुविधा नहीं

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जिले में कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन पोस्ट कोविड बीमारी यानी ब्लैक फंगस के नए केस सामने आ रहे हैं। जिले में पोस्ट कोविड ओपीडी की सुविधा नहीं होने के कारण सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीजों को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है।
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जिले में अब कोरोना संक्रमण से अधिक ब्लैक फंगस को लेकर लोगों में डर है। पूर्व में कोरोना संक्रमित हो चुके लोग इस बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। लेकिन जिले में अभी तक ब्लैक फंगस के इलाज के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। संसाधनों और डॉक्टरों की कमी के चलते पोस्ट कोविड ओपीडी की सुविधा भी नहीं है। ब्लैक फंगस के लक्षण मिलने का संदेह होने पर लोग रुद्रपुर कोविड अस्पताल पहुंच रहे हैं। यहां डॉक्टर उनसे लक्षणों के बारे में पूछ रहे हैं।
अधिकांश लक्षण ब्लैक फंगस की तरह मिलने पर उन्हें एसटीएच रेफर किया जा रहा है। जिले में अब तक 12 लोगों में ब्लैक फंगस के लक्षण मिलने पर उन्हें एसटीएच रेफर किया जा चुका है। इनमें गदरपुर निवासी एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जिसे एसटीएच के बाद ऋषिकेेश एम्स रेफर किया गया है। बता दें कि जिले में सितारगंज निवासी एक व्यक्ति की ब्लैक फंगस से मौत हो चुकी है। कोविड अस्पताल के नोडल ऑफिसर डॉ. गौरव अग्रवाल कहते हैं कि जिले में अभी ब्लैक फंगस के संक्रमण की स्थिति सामान्य है। इस बीमारी के अभी कम ही मरीज मिल रहे हैं। कोविड अस्पताल में मरीजों के लक्षण के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ मरीज आंख की पलक के नीचे आने की शिकायत कर रहे हैं।
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ब्लैक फंगस के प्रमुख लक्षण
आंखों और नाक के पास लालिमा
चेहरे पर एकतरफा सूजन
खांसी और बुखार आना
खून की उल्टी आना
मानसिक स्थिति में बदलाव
सिर में लगातार असहनीय दर्द होना
सांस लेने में तकलीफ
जिले में ब्लैक फंगस के लक्षण मिलने पर मरीजों को एसटीएच रेफर किया जा रहा है। राज्य में अभी हल्द्वानी और ऋषिकेश में ही इसके इलाज की सुविधा है। जिले में अभी पोस्ट कोविड ओपीडी शुरू नहीं हुई है। - डॉ. आरएस सामंत, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक।
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