फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udham Singh Nagar News: दिल्ली और देहरादून में छा रहे तराई में बने मूंज घास के उत्पाद

Sat, 12 Jul 2025 12:41 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रपुर। तराई में नानकमत्ता के कामना स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिकी का आधार नदी-नालों के किनारे उगने वाली मूंज घास बनी हुई है। तराई के उत्पाद आज जिले में ही नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी देहरादून और देश की राजधानी दिल्ली की पसंद बन गए हैं।
विज्ञापन

प्रतिमाह समूह को दिल्ली-देहरादून से मूंज घास के उत्पादों की डिमांड आती है। इसके साथ ही प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में लगने वाले सरस मेले में मूंजघास के उत्पादों की मांग होती है। 2015-16 से समूह से जुड़ी महिलाओं के जीवन में बड़े बदलाव आए हैं। महिलाएं घरों से निकलीं और घर की आर्थिकी भी सुदृढ़ हुई। आज समूह प्रतिमाह 40 से 50 हजार रुपये की बचत कर रहा है तो प्रत्येक महिला 07-08 हजार रुपये बचत कर रही है। बीएमएम सुनीता कश्यप ने बताया कि कामना समूह की महिलाओं के मूंज घास के बने उत्पाद की लगातार मांग बढ़ रही है। इनके उत्पाद को आधुनिकता देने पर काम किया जा रहा है।
दिल्ली से आया 50 हजार का आर्डर
रुद्रपुर। कामना समूह मूंज घास से रोटी बाॅक्स, फूलदान, पूजा वाली डलिया, कोस्टर, भगवान गणेश की मूर्ति, पेन सेट आदि उत्पादों का निर्माण करता है। इधर जुलाई माह में समूह को 50 हजार का आर्डर मिला है। इसमें सबसे अधिक डिमांड दीवारों को सजाने वाले सामान की है। संवाद
विज्ञापन

समूह के साथ अन्य महिलाओं को मिला रोजगार का अवसर
रुद्रपुर। नानकमत्ता-झनकट के कामना समूह में कुल 10 महिलाएं जुड़ी हैं। इसमें सुशीला, मीना, राजकुमारी, लक्ष्मी, सुमन, आरती और जानकी ही सक्रिय रूप से काम करती हैं। इसमें सुशीला अब मूंज घास की मास्टर ट्रेनर भी बन गई हैं। समूह को जब किसी-किसी माह अधिक आर्डर मिल जाता है तो गांव की महिलाओं को उत्पाद बनाने में जोड़ लेती हैं। संवाद
सितंबर में मूंज घास को कर लेती हैं स्टाेर
रुद्रपुर। सितारगंज और नानकमत्ता क्षेत्र की नदियों और नालों के किनारे बड़ी संख्या में मूंज घास होती है। सितंबर माह में समूह की महिलाएं इकट्ठा होकर नदी किनारे जाती हैं और मूंज घास निकालती हैं। इस माह महिलाएं बड़ी संख्या में मूंज घास स्टोर कर लेती हैं जो पूरे साल काम करती है। संवाद
जिले में समूह की महिलाएं अच्छा काम कर रही हैं। समूहों के उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ दूसरे प्रदेशों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। महिलाओं को अलग-अलग उत्पाद निर्माण के लिए प्रशिक्षित भी कराया जा रहा है। दिवेश शाशनी, सीडीओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें