पौराणिक और ऐतिहासिक काशीपुर में छोटा नीम का पेड़ शहर की बड़ी पहचान है। नीम के इसी पेड़ ने देश की नामी हस्तियों को छांव दी है। 87 साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी यहां आए थे। उन्होंने यहां आजादी के आंदोलन की अलख जगाई थी।
पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटा नीम का पेड़ कई ऐतिहासिक यादें संजोए है। नगर के वरिष्ठ नागरिक विमल गुड़िया बताते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1935 में काशीपुर आए थे और इसी छोटे नीम के पेड़ के नीचे बैठे थे। उन्हें देखने दूरदराज से लोग उमड़ पड़े थे। वह यहां देश की आजादी को लेकर चल रहे आंदोलन की अलख जगाने आए थे। बताया कि बापू के अलावा इस पेड़ की छांव मेें आचार्य विनोबा भावे, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, महामना मदन मोहन मालवीय, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी क्षेत्रवासियों को संबोधित कर चुके हैं।
छोटे नीम के पेड़ के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए निकाय ने इसे संरक्षित किया है। इसके चारों ओर पक्का चबूतरा बनाने के साथ पेड़ के नीचे उन महापुरुषों के नाम का शिलापट भी लगाया गया है, जिन्होंने यहां से क्षेत्रवासियों को संबोधित किया था। यहां लगे शिलापट के दूसरी ओर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम भी अंकित हैं।
समय-समय पर होते हैं विभिन्न आयोजन
काशीपुर। छोटे नीम के पेड़ की छांव से विभिन्न संगठनों के लोग राष्ट्रीय पर्व पर प्रभात फेरी निकालते हैं। महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम इस पेड़ के नीचे ही होते हैं।
दो सौ वर्ष से अधिक पुराना है छोटा नीम
काशीपुर। 70 वर्षीय विमल गुड़िया बताते हैं कि छोटा नीम का पेड़ कितना पुराना है, इसकी सटीक जानकारी तो नहीं है लेकिन अनुमान के मुताबिक लगभग दो सौ वर्ष से अधिक तो इस पेड़ को हो गए होंगे।