रुद्रपुर। सुदुर गांवों में हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल पहुंचाने वाली जल जीवन मिशन के संचालन की अस्पष्ट नीति गर्मी में दुखदाई बन सकती है। प्रचंड गर्मी में अगर कहीं पाइपलाइन या सप्लाई में दिक्कत आई तो ग्रामीणों का गला तर करना दूभर हो जाएगा।
जिले में जल जीवन मिशन की कुल 331 योजनाएं संचालित हैं। इसमें 200 से अधिक योजनाएं पूरी हो चुकी है। लगभग 35 फीसदी योजनाओं को पूरा हुए एक वर्ष से अधिक हो चुका तो 30 फीसदी छह माह पूर्व पूरी हुई हैं। वर्तमान में याेजनाएं संचालित भी हैं। एक-दो माह बाद मिशन पूरा हो जाएगा लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इसका संचालन कौन करेगा और कैसे करेगा।
नियोजन जिस विभाग का वही करेगा संचालन
विभागीय सूत्रों की मानें तो शासन का स्पष्ट निर्देश है कि योजनाओं का नियोजन जिस विभाग ने किया है, वही इसका संचालन भी करेगा। अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि छह माह से लेकर एक वर्ष पुरानी योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए कोई आदेश क्यों नहीं जारी हुआ। अब तक रखरखाव के मद में एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
ग्राम पेयजल समिति के पास भी इतना धन नहीं
जेजेएम की योजनाओं को ग्राम पेयजल समिति को संचालन का जिम्मा सौंपने की बात चली थी। केंद्रीय वित्त की धनराशि का लगभग 35 फीसदी हिस्सा ग्राम पंचायत को पेयजल और स्वच्छता के मद में मिलता है। अब ऐसे में सवाल यह है कि इस छोटी धनराशि से कैसे समिति इस बड़ी योजना का संचालन कर पाएगी।
विनती कर ठेकेदारों से कराया जाता है काम
जल जीवन मिशन की पूर्ण योजनाओं के संचालन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने की स्पष्ट नीति लागू नहीं होने से अभी तक विभाग योजना में काम कर रहे ठेकेदारों के भरोसे है। कहीं अगर पानी की सप्लाई में बाधा आ जाती है तो ठेकेदारों की मान-मनौव्वल कर विभाग ठीक कराता है।
शासन का निर्देश है कि जिस विभाग का नियोजन है, वही संचालित करेगा। पूर्ण योजनाओं में कहीं-कहीं दिक्कतें आती हैं। उन्हें ठेकेदारों के माध्यम से हल कराया जाता है। योजना के संचालन के लिए धनराशि की आवश्यकता है। सुनील जोशी, अधिशासी अभियंता, पेयजल।