काशीपुर। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उमेश जोशी ने कानून एवं न्याय मंत्री भारत सरकार अर्जुन राम मेघवाला को पत्र भेजकर अधिवक्ता संशोधन बिल-2025 पर आपत्ति जताई है। इधर अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
बार के पूर्व अध्यक्ष जोशी ने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार ने एडवोकेट एक्ट 1961 में संशोधन करने के लिए अधिवक्ता -2025 का ड्राफ्ट जारी कर 28 फरवरी तक अधिवक्ताओं एवं जनमानस के सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन ड्राफ्ट को गहनता से अध्ययन करने पर इसमें कई बिंदु पर आपत्ति हैं। जिसमें मुख्य रूप से प्रस्तावित धारा 36(1) में अधिवक्ताओं का लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान। प्रस्तावित धारा 35 ए के अनुसार अधिवक्ताओं द्वारा विरोध, प्रदर्शन, हड़ताल और अदालत के बहिष्कार पर रोक का प्रावधान। प्रस्तावित धारा–35 के अनुसार अस्पष्ट रूप से परिभाषित दुराचार के लिए दंड और प्रैक्टिस से हटाए जाने का प्रावधान। प्रस्तावित धारा–45 बी के अनुसार वादकारियों को नुकसान के लिए अधिवक्ताओं द्वारा भरपाई का प्रावधान और प्रस्तावित धारा–72 के अनुसार विदेशी विधि फर्मों का भारत में वकालत की अनुमति का प्रावधान पर आपत्ति है।
पूर्व बार अध्यक्ष जोशी ने कहा कि भारत में अधिवक्ताओं के संबंध में पूर्व में एडवोकेट एक्ट 1961 लागू है। वर्तमान प्रस्तावित संशोधन बिल 2025 अधिवक्ताओं के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्राप्त संवैधानिक व मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने प्रस्तावित बिल को राष्ट्र और समाज के हित में तत्काल वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान बार अध्यक्ष अवधेश कुमार चौबे, अनूप शर्मा, नृपेंद्र कुमार चौधरी, सूरज कुमार, सौर्य शर्मा, रश्मि पाल, शैलेंद्र मिश्रा, नरेश कुमार पाल आदि मौजूद रहे।
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जिला न्यायालय में न्यायिक कार्यों से विरत रहे अधिवक्ता
रुद्रपुर/सितारगंज/खटीमा/जसपुर। जिला बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 में केंद्र सरकार की ओर से लाए जा रहे संशोधन बिल के विरोध में न्यायिक कार्यों से विरत रहे। उन्होंने प्रदर्शन कर संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की।
शनिवार को न्यायालय परिसर में प्रदर्शन के बाद बार अध्यक्ष दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता और सचिव सर्वेश कुमार सिंह के संचालन में सभा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोगों की न्याय व्यवस्था के लिए लड़ाई लड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिवक्ताओं में संशोधन बिल को लेकर नाराजगी है। अधिवक्ता पुरजोर तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं।
धारा-35ए में न्यायालय के काम में बहिष्कार करने पर रोक लगाने का प्रावधान है। अभी इस मसौदे पर लोगों की राय मांगी गई है। वहां पर एसोसिएशन कोषाध्यक्ष पावेल कठायत, सदस्य अमित छाबड़ा, संजीत बढई, आशीष त्रिपाठी, गौरव मिडढा, परविंदर सिंह, अखिलेश कुशवाहा, जयप्रकाश गंगवार, शाहिद हुसैन, शिवकुंवर सिंह, सुरेंद्र गिरधर आदि मौजूद रहे।
सितारगंज में अधिवक्ता संशोधन अधिनियम बिल 2025 के विरोध में तीसरे दिन भी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में केंद्र सरकार का न्यायपालिका में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। बार एसोसिएशन अध्यक्ष दयानंद सिंह के नेतृत्व में धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने शनिवार को अधिवक्ता संशोधन अधिनियम बिल 2025 की प्रतियां जलाकर बिल का कड़ा विरोध जताया। वहां पर हरीश दुबे, रवि सक्सेना, राहुल, प्रकाश पांडे, मनोरमा, उर्मिला, फरमान, राम बदन सागर, भगवत सिंह, निकिता, मोहम्मद हनीफ, राधेश्याम शर्मा, अफसर अली, एसके सिंह, फहीम पटौदी, सरिता, रमेश कांत प्रभाकर, गुरमीत सिंह, प्रकाश ढाली आदि थे। इधर, खटीमा में अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष सूरज प्रकाश राणा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि आंदोलन तेज किया जाएगा। वहां पर हरजीत सिंह, सतीश चौहान, विवेक जोशी, हयात सिह कुंवर, रामवचन, दीपा बोरा, पूजा अग्रवाल, लखविंदर सिंह, इलियास सिद्दीकी, जमील अहमद, सचिन सिंह, कमान धामी आदि थे।
जसपुर में बार एसोसिएशन के वकीलों ने अधिवक्ता संशोधन बिल के खिलाफ कार्य बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन के सचिव जुल्फिकार अली के नेतृत्व में वकीलों ने नारेबाजी कर मंडी परिसर में सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। बार अध्यक्ष सुंदरपाल सिंह, सचिव अनिल जोशी, रवि सिंह, अरविंद कुमार, राजकुमार, राजीव कुमार आदि वकील थे। संवाद