काशीपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर में अविन्या 2025 कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसकी थीम डिजाइन थिंकिंग लीड इनोवेशन रखी गई। इस दौरान देश के डिजाइन थिंकिंग, इनोवेशन और रणनीतिक परिवर्तन के क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। कॉन्क्लेव नवाशय- डिजाइन इनोवेशन सेंटर और एकेडमिक कमेटी की ओर से आयोजित किया गया। इस दौरान आईआईएम और अकीरा एनालिटिक्स के बीच डिजाइन-लैड इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एमओयू भी साइन किया गया। बता दें कि डिजाइन थिंकिंग व्यावहारिक, रचनात्मक समस्याओं के समाधान और समाधान के निर्माण के लिए एक विधि है। इसी के चलते आईआईएम में विशेषज्ञों ने समस्याओं के समाधान को लेकर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपने विचार व्यक्त किए।
शनिवार को आईआईएम काशीरपुर में अविन्या कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद सत्र का शुभारंभ किया। इसके बाद मैकिंजी एंड कंपनी के एक्सपर्ट डिजाइन डायरेक्टर पुलिन राजे ने एक प्रश्न किया कि क्या थिंकिंग डिजाइन के माध्यम से हेल्थकेयर में क्रांतिकारी बदलाव किया जा सकता है? उन्होंने बताया कि डिजाइन थिंकिंग व्यापार में ठोस प्रभाव डाल सकता है जिससे 32 प्रतिशत से अधिक राजस्व वृद्धि और 56 प्रतिशत से अधिक शेयरधारकों को लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने इंडोनेशिया के अस्पतालों में किए गए फील्ड रिसर्च का उदाहरण दिया जहां नवजात शिशु पुनर्जीवन निगरानी डिवाइस विकसित किया गया है क्योंकि वहां माताओं को उन्नत स्वास्थ्य तकनीक तक सीमित पहुंच थी। उनके सत्र में मानव-केंद्रित डिजाइन के महत्व पर खास जोर दिया गया।
डिजाइन थिंकिंग है दैनिक जीवन का हिस्सा
अकीरा एनालिटिक्स के संस्थापक प्रसन्ना बालासुब्रमण्यम ने बताया कि डिजाइन थिंकिंग इनोवेशन (डीटीआई) केवल क्रमिक सुधार नहीं बल्कि कट्टरपंथी परिवर्तन की बात करता है। उन्होंने कहा कि डिजाइन थिंकिंग कोई निर्धारित संरचित प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है। परंपरागत व्यापार रणनीतियों के विपरीत, डिजाइन थिंकिंग मानकीकृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर पर निर्भर नहीं करता जिससे आसान, रचनात्मकता और अनुकूलनशीलता बढ़ती है। उन्होंने नवाचार की कठनाइयों को अपनाने और डिजाइन थिंकिंग को केवल एक पद्धति नहीं बल्कि एक मानसिकता के रूप में देखने का आग्रह किया।
नवाचार केवल विचारों तक सीमित नहीं
एक्सेंचर की वाइस प्रेसिडेंट इनोवेशन स्ट्रेटजी सुचि अग्रवाल ने बताया कि जनरेटिव एआई केवल भविष्यवाणी करने से आगे बढ़कर रणनीतिक निर्णय लेने में मदद कर सकता है। सच्चा नवाचार तभी संभव है जब हम सही उपयोग का मामला चुनें, समस्या को गहराई से समझें, समाधान डिजाइन करें और लगातार उसमें सुधार करें।
बिजनेस एक्सीलेंस के कॉरपोरेट हेड संजय दफलापुरकर ने रतन टाटा के 1995 के भाषण का हवाला दिया जिसमें बोल्ड बनने, अधिक रचनात्मक होने और नवाचार को अपनाने पर जोर दिया गया था। उन्होंने बताया कि नवाचार केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए साहसिक निर्णय लेना और चुनौतियों का समाधान करने की प्रतिबद्धता आवश्यक है।