काशीपुर। शासन की उदासीनता कहें या फिर स्वास्थ्य विभाग की, दो दशक से सरकारी अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ का पद है। सरकारें आईं और गईं, लेकिन अस्पताल को चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं मिल पाया। हालात ऐसे है कि गरीब लोगों को उपचार के लिए निजी डाॅक्टरों से महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।
एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में काशीपुर, जसपुर, बाजपुर, सुल्तानपुर पट्टी, अलीगंज, ठाकुरद्वारा, रेहड़ बिजनौर आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते है। इनमें से प्रतिदिन करीब 25-30 मरीज मुंहासे, पित्ती या चकत्ते, दाग, कट या खरोंच के कारण हुए निशान, अंदर की ओर बढ़े हुए नाखून या फंगस आदि बीमारी के भी होते हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ के न होने पर अन्य चिकित्सकों से दवाई लिखवा कर ले जाते हैं। बता दें कि करीब दो दशक पूर्व चिकित्सालय में चर्म रोग विशेषज्ञ के पद पर डाॅ. एसके टम्टा सीएमएस रह चुके हैं। उनका स्थानांतरण होने के बाद से आज तक इस पद पर चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। गरीब मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोट:
चर्म रोग विशेषज्ञ केवल रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में हैं। ऊधमसिंह नगर के अस्पतालों में कोई भी चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। रिक्तियों की सूची लगातार मुख्यालय भेजी जा रही है। चिकित्सक की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, ऊधमसिंह नगर