काशीपुर। प्रदेश में कागज उद्योग पर नोट बंदी का बुरा असर पड़ने लगा है। प्रदेश की 33 पेपर मिलें नोट बंदी से गंभीर संकट में आ गई हैं। कच्चा माल खरीदने, छोटे खर्चों लिए नकद रुपए न होने से मिलों का 20 प्रतिशत तक उत्पादन गिर गया है। इन पेपर मिलों में प्रतिदिन छह सौ मैट्रिक टन कागज का उत्पादन कम हो गया है।
उत्तराखंड में वर्तमान में 33 पेपर मिलें संचालित हो रही हैं। इनमें 27 ऊधमसिंह नगर जिले में, एक लालकुंआ में और पांच रुड़की में संचालित हो रही है। इन पेपर मिलों से सरकार को हर साल करीब सौ करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। किसान गेहूं का भूसा, धान की पुआल पेपर मिलों को बेचते हैं। जो कागज बनाने के काम आता है।
वर्तमान में नोटबंदी से पेपर मिलें लड़खड़ाने लगी हैं। उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत तक गिर गया है। कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) के अनुसार पहले इन मिलों में पहले रोजाना करीब तीन हजार मिट्रिक टन कागज का उत्पादन करती थी। जो अब घटकर 2400 मैट्रिक टन ही रह गया है।
काशीपुर। केजीसीसीआई पेपर चैप्टर के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने कहा कि नोटबंदी के बाद पेपर मिलों की स्थिति गंभीर हो गई। कर्मचारियों का वेतन तो बैंक खातों से दिया जा रहा है। लेकिन मिल में कई अन्य कामों पर दिहाड़ी के मजदूर लगते हैं। मजदूरों का भुगतान, भूसा, पुआल लाकर मिलों को बेचने वाले किसानों का भुगतान, मशीनों की मरम्मत सहित अन्य कामों के लिए नकद भुगतान की जरूरत होती है। कहा कि सरकार को मिल प्रबंधकों के लिए 10 लाख रुपए प्रति सप्ताह बैंक खातों से निकालने की अनुमति देनी चाहिए।